ओडिशा सरकार ने उठाई जातिगत जनगणना की मांग

जातिगत मतगणना को लेकर कई राजनीतिक पार्टियां अक्सर केंद्र सरकार को घेरती हैं। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव से लेकर बिहार में लालू यादव तक ने इसकी मांग की है। वहीं संसद में चल रहे मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि देश में तीन राज्यों की सरकारें बिहार, महाराष्ट्र और ओडिशा के साथ अन्य संगठनों ने आगामी जनगणना में जातिगत विवरण लेने का अनुरोध किया है।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि केंद्र सरकार ने आजादी के बाद से जनगणना में एससी और एसटी के अलावा अन्य जातियों की जनसंख्या की गणना नहीं की है। वहीं इससे पहले देश में जनगणना को कोरोना के प्रकोप के कारण रोक दिया था। केंद्रीय मंत्री राय ने कहा कि जनगणना में वे जातियां और जनजातियां जिन्हें संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 और संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 के अनुसार विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के रूप में अधिसूचित किया गया है, जो समय-समय पर गिनाए जाते हैं।
साथ ही उन्होंने कहा कि जनगणना में जनसंख्या और शिक्षा, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, धर्म, भाषा, विवाह, प्रजनन क्षमता, अक्षमता, पेशा और व्यक्तियों के प्रवास जैसे विभिन्न सामाजिक आर्थिक मापदंडों पर डेटा एकत्र किया जाता है। उन्होंने कहा कि जनगणना के पहले चरण की प्रश्नावली को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया था।
आगे मंत्री राय ने कहा कि आगामी जनगणना पहली डिजिटल जनगणना है और इसमें स्व-गणना का प्रावधान है। डेटा संग्रह के लिए एक मोबाइल ऐप और विभिन्न जनगणना संबंधी गतिविधियों के प्रबंधन और निगरानी के लिए एक जनगणना पोर्टल विकसित किया गया है। बता दें कि सरकार इस जनगणना पूरी तरह से डिजिटली रूप से करेगी, इसके लिए लोगों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।












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