बायो-टेक की दिशा में आगे बढ़ रही ओडिशा सरकार, जानिए पूरी योजना
ओडिशा सरकार ने क्षेत्रीय निवेश आकर्षित करने के मकसद से, एक नई प्रगतिशील जैव प्रौद्योगिकी नीति विकसित करने के लिए एसोसिएशन ऑफ बायोटेक्नोलॉजी लेड एंटरप्राइजेज (एबल) को पहले ही शामिल कर लिया है।

ओडिशा में उपलब्ध जैव-संसाधनों से नए उत्पाद विकसित करने के लिए बायो-टेक को कैसे एकीकृत किया जाए, इसपर राज्य की नवीन पटनायक सरकार एक खाका तैयार करने की योजना बना रही है।
रविवार को हैदराबाद में जैव-एशिया सम्मेलन में बोलते हुए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री अशोक चंद्र पांडा ने कहा, 'जैव-प्रौद्योगिकी नए औद्योगिक नीति संकल्प (IPR-2022) के तहत एक बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो प्राथमिकता वाले उद्योगों के लिए कई प्रोत्साहन प्रदान करता है। हमारा राज्य अपनी समृद्ध प्राकृतिक जैव-विविधता और जैव-संसाधनों के लिए जाना जाता है। हम नए उत्पादों के विकास के लिए जैव-प्रौद्योगिकी और जैव-संसाधनों के बीच एक पूर्ण एकीकरण लाना चाहते हैं जो ओडिशा को जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक नया केंद्र बना देगा।'
राज्य सरकार ने क्षेत्रीय निवेश आकर्षित करने के मकसद से, एक नई प्रगतिशील जैव प्रौद्योगिकी नीति विकसित करने के लिए एसोसिएशन ऑफ बायोटेक्नोलॉजी लेड एंटरप्राइजेज (एबल) को पहले ही शामिल कर लिया है। इसके अलावा ग्लोबल नेटवर्क ऑफ एंटरप्रेन्योर्स एंड प्रोफेशनल्स फॉर ओडिशा (जीएनईपीओ) ने वैश्विक आउटरीच के साथ राज्य में जैव-उद्यमिता विकास के लिए एक मंच प्रदान करने के मकसद से वैश्विक ओडिशा उद्यमशीलता के आदान-प्रदान की सुविधा के लिए एक समझौता किया है।
वहीं, भुवनेश्वर के बाहरी इलाके में अंधरूआ में एक बायोटेक पार्क विकसित करने के लिए कई पहल की गई हैं। भारत बायोटेक ने अपने एंकर टेनेंट Sapigen Biologix के माध्यम से पार्क में विभिन्न टीकों के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। अशोक चंद्र पांडा ने कहा कि फार्मा कंपनी के प्रमोटर ने भी इसके विस्तार के लिए 700 करोड़ रुपये निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह अपनी आगामी इकाई में मलेरिया और कोविड सहित 10 प्रकार के टीकों का निर्माण करेगी।












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