सुंदरगढ़ के 11 औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने की जांच के लिए NGT ने बनाया पैनल
NGT forms panel violation of environmental norms at 11 industrial establishments of Sundergarh
ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के 11 औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर पर्यावरण मानदंडों का घोर उल्लंघन करने का आरोप है। जिसकी जांच के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हाई लेवल पैनल का गठन किया है। औद्योगिक प्रतिष्ठानों के पास अपने संयंत्र क्षेत्र में अपेक्षित प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित नहीं हैं, इसके संबंध में एक याचिका दाखिल की गई थी।

कोलकाता में एनजीटी की पूर्वी क्षेत्र पीठ ने सुंदरगढ़ क्षेत्र के निवासी सुधांशु शेखर पात्रा और अन्य द्वारा दायर पत्र याचिका पर संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने इस पैनल का गठन किया और मामले में सहायता के लिए अधिवक्ता शंकर प्रसाद पाणि को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। इस पैनल में सुंदरगढ़ कलेक्टर या उनके नामित प्रतिनिधि, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, सीपीसीबी और ओएसपीसीबी के वरिष्ठ वैज्ञानिक और एमिकस क्यूरी शामिल हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों के पास के पास अपने संयंत्र क्षेत्र में अपेक्षित प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित नहीं हैं। स्पंज आयरन इकाइयों ने नाम मात्र के लिए डी-डस्टिंग सिस्टम स्थापित किए हैं जिनका रखरखाव नहीं किया जाता है और वे दोषपूर्ण बैगों के साथ काम हो रहा है।
इसके अवावा ये भी शिकायत की गई है कि पौधों से निकलने वाले पानी को अनुपचारित छोड़ दिया जाता है और उसे नदी या खेती योग्य भूमि और कुओं में प्रवाहित किया जा रहा है।
अधिकांश उद्योगों के पास उचित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं हैं। एक भी प्लॉट के पास हवा में धूल की गति को रोकने के लिए कोहरा कैनन भी नहीं है। कोयले के ढेर पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं।
याचिका में खुलासाा किया गया है कि बरसात में लकड़ी का कोयला बारिश के पानी के साथ बह जाता है और खेती योग्य भूमि में ये जाकर जमा हो जाता है। जिससे खेती वाली भूमि की उर्वरकता में कमी आती है।
पत्र याचिका में ये भी उजागर किया गया है कि गर्मी और सर्दी के मौसम में, कोयले की धूल हवा में फैल जाती है, जिससे पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
न्यायमूर्ति बी अमित स्टालेकर और डॉ अरुण कुमार वर्मा (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने कहा कि समिति औद्योगिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करेगी और दो महीने के भीतर एक रिपोर्ट सौंपेगी।
पीठ ने कहा पैनल की जांच रिपोर्ट में इन 11 औद्योगिक प्रतिष्ठनों में यदि उल्लंघन पाया जाता है, तो समिति जुर्माने के साथ-साथ पर्यावरणीय मुआवजे की सिफारिश करेगी और यदि कोई हो तो उपचारात्मक उपाय भी सुझाएगी।












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