कोटा : गंदे नाले का पानी मकानों में घुसा, चंबल रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट में भी सामने आई अफसरों की लापरवाही
नई दिल्ली, 18 जुलाई। राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा में एक तरफ करोड़ों रुपए के विकास कार्य यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल द्वारा करवाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ धारीवाल के ड्रीम प्रोजेक्ट चंबल रिवर फ्रंट को नया रूप भी दिया जा रहा है। लेकिन इस नए रूप के लिए पुराने स्वरूप को यूआईटी के अधिकारियों द्वारा बिगाड़ा जा रहा है।

दरअसल, रामपुरा फतेहगढ़ी के पीछे चंबल रिवर फ्रंट का एक हिस्सा तैयार हो रहा है। जहां का प्रोजेक्ट संभालने वाले अधिकारियों की लापरवाही से स्थानीय लोगों की नींद उड़ गई। फतेहगढी के पिछले हिस्से में यूआईटी द्वारा नाले का निर्माण घटिया तरीके से करवाया गया। जिसकी वजह से नाले का गंदा पानी लोगों के घरों तक जा पहुंचा। कुछ मकान आधे पानी में डूब गए। शिकायत के बाद भी लोगों की समस्या का समाधान नहीं हुआ। मजबूरी में स्थानीय लोगों को पानी के बीच में ही पिछले कई दिनों से अपनी रात गुजारनी पड़ रही है।
परकोटे क्षेत्र में बसा रामपुरा का छोटे से फतेहगढ़ी इलाके के पीछे ही चंबल रिवर फ्रंट का काम चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पर पहले एक नाला बना हुआ था इस नाले में रामपुरा, लाडपुरा सहित कई जगह का गंदा पानी बहकर निकलता था।
यूआईटी के अधिकारियों ने नाले को और बड़ा बनाने के चक्कर में उसका मुंह स्थानीय कॉलोनी की तरफ मोड़ दिया। जिससे पूरे इलाके का गंदा पानी घरों के बाहर इकट्ठा होना शुरू हो गया। स्थानीय निवासी रमाकांत ने बताया कि उसका घर बीच में होने से नाले का सारा गंदा पानी घर के बाहर इकट्ठा हो गया।
यही नहीं घर का निचला हिस्सा पूरी तरह से पानी में डूब गया। अधिकारियों से शिकायत की लेकिन किसी ने भी कोई ध्यान नहीं दिया। यही हाल आसपास के घरों में भी देखने को मिला। महिलाओं का कहना है कि इस गंदे पानी की वजह से मच्छर पनपने लगे हैं। साथ ही पूरे दिन भर और रात भर बदबू की वजह से लोग घरों में नहीं रह पा रहे हैं। बारिश का भी मौसम है लेकिन यह पानी बारिश का नहीं गंदे नाले का है। ऐसे में आने वाले समय में नेहा और मुसीबत पैदा हो जाएगी।












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