प्राकृतिक खेती बनाएगी कृषि उत्पादों को लाभकारी, हरियाणा सरकार ने दिया 32 Cr का बजट

रोहतक। कृषि उत्पादों को अब प्राकृतिक खेती विशुद्ध व लाभकारी बनाएगी। प्रदेश सरकार ने इसके लिए 32 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है। प्राकृतिक खेती का बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक करेगा। हालांकि सभी किसानों का रुझान प्राकृतिक खेती की ओर करने में समय लग सकता है। लेकिन माना जा रहा है कि यह योजना किसानों के साथ ही प्रदेश के लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी। जनता को रासायनिक खादों पर आधारित उत्पादों से मुक्ति दिलाने, भूमि की सेहत को सुधारने, भू-जल का संरक्षण करने व आमजन के स्वास्थ्य को बेहतर रखने के उद्देश्य से ही सरकार प्राकृतिक खेती पर फोकस कर रही है।

Natural farming will make agricultural products beneficial, Haryana government budget of 32 Cr

अधिकारियों के मुताबिक प्राकृतिक खेती के विषय को लेकर ऐसी महत्वपूर्ण बातें उभर कर सामने आई है, जिनसे कृषि उत्पादों का विशुद्घ एवं लाभकारी बनाया जा सकता है। जीरो बजट प्राकृतिक खेती, जो देसी (स्वदेशी नस्ल) गाय, उसके गोबर और मूत्र के कृषि उद्देश्यों के उपयोग को तो बढ़ावा देती है। वहीं, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशों जैसे खरीदे गए इनपुट पर किसानों की निर्भरता को भी कम करने के लिए एक आशाजनक उपकरण बन रही है। उत्पादन की लागत को कम करके, यह खेती को लाभदायक बना रही है। इसी के चलते अधिकारियों की ओर से भी किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया गया है।

इस संबंध में जिला उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार की ओर से कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि वे किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक करें। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को इस खेती के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने प्राकृतिक कृषि बोर्ड का गठन करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती के लिए सरकार ने 32 करोड़ का प्रावधान भी बजट में किया है। राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती के लिए तीन साल उत्पादन आधारित योजना भी तैयार की है।

प्राकृतिक खेती में रासायनिक खादों व कीटनाशकों के स्थान पर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है, जिससे रासायनिक खादों व कीटनाशकों पर खर्च होने वाली राशि की बचत होती है। प्राकृतिक खेती के तहत गाय के गोबर एवं गोमूत्र की मदद से विशेष घोल तैयार किया जाता है, जिसका प्रयोग फसलों में किया जाता है। ऐसा करने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।

जिला में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके। विभाग की ओर से प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को जागरूक भी किया जाएगा। प्राकृतिक खेती समय की मांग है। यह खेती किसानों के साथ ही आम जनता के लिए भी फायदेमंद साबित होगी।
- डा. वजीर सिंह, उप निदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।

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