तेलंगाना के बाहर पैर पसारने का प्लान, उत्तर कर्नाटक की 41 सीटों पर CM केसीआर की BRS का फोकस
तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर की पार्टी बीआरएस कर्नाटक के 41 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना पर मंथन कर रही है। खबरों के मुताबिक जेडीएस के साथ गठबंधन के तहत उम्मीदवार उतारें जा सकते हैं।

तेलंगाना की सत्तारुढ़ पार्टी- TRS अब भारत राष्ट्र समिति (BRS) के रूप में भावी योजनाएं बना रही है। अप्रैल 2023 में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने की संभावना के बीच बीआरएस सुप्रीमो और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और कर्नाटक में पहले सरकार बना चुकी जनता दल सेकुलर (जेडीएस) के प्रमुख और पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी ने गठबंधन के लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दलों के अध्यक्षों ने उत्तर कर्नाटक की 41 विधानसभा सीटों पर चर्चा की। इन सीटों को 'गुलबर्गा डिवीजन' और 'कल्याण कर्नाटक' भी कहा जाता है।
जेडीएस सूत्रों ने कहा कि पार्टी ने आने वाले चुनावों के लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है। उम्मीदवारों की सूची तैयार करने के साथ-साथ अन्य दलों के नेताओं को गठबंधन के लिए आमंत्रित किया जा रहा है, जहां जेडीएस कमजोर मानी जाती है।
कर्नाटक में चुनावी संभावनाएं टटोल रही बीआरएस से जुड़े सूत्रों ने कहा, पार्टी सुप्रीमो केसीआर जनता दल सेकुलर (जेडीएस) के साथ गठबंधन के तहत 41 विधानसभा क्षेत्रों में से कई सीटों पर उम्मीदवार उतारने के इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि केसीआर ने पिछले विधानसभा चुनाव में उत्तरी कर्नाटक में वोट शेयर और किस दल को कितने वोट मिलेंगे, इन आंकड़ों के आधार पर गठबंधन में सीट शेयर पर ध्यान केंद्रित किया है।
सूत्रों ने कहा कि केसीआर कर्नाटक के उन सात जिलों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं जिनकी सीमा तेलंगाना से लगती है। बीआरएस का मानना है कि इन जिलों के मतदाता केसीआर का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि केसीआर पहले से ही इन सात जिलों में लोगों के मूड, बीआरएस के बारे में उनकी राय और कर्नाटक में अगली सरकार से आम जनता की अपेक्षाओं के बारे में डेटा जमा कर रहे हैं।
पिछली बार हुए चुनाव में जेडीएस ने यादगीर जिले की चार सीटों में से केवल एक (गुरुमित्कल) पर जीत हासिल की थी। बीदर जिले की छह सीटों में एक (बीदर दक्षिण) और रायचूर के सात निर्वाचन क्षेत्रों में से मानवी और सिंधनूर विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने वाली जेडीएस अब बीआरएस के साथ सीट शेयर करने की योजना बना रही है। बीदर, यादगीर, रायचूर, विजयनगर, बेल्लारी, कलबुर्गी और कोप्पल में बीआरएस उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं। इन जिलों के लोग तेलुगु के साथ-साथ उर्दू और हिंदी भी बोलते हैं। 41 में से 35 विधानसभा क्षेत्रों के लोग धाराप्रवाह तेलुगु बोलते हैं क्योंकि 1948 तक ये इलाके हैदराबाद का हिस्सा थे।
बीआरएस प्रमुख इन जिलों के किसानों को तेलंगाना सरकार की रायथु बंधु, रायथु बीमा और कृषि क्षेत्र के लिए 24×7 मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं के बारे में बताना चाहते हैं। सूत्रों ने कहा कि जेडीएस के पास अच्छा वोट शेयर है और इन जिलों के अधिकांश किसान सीएम केसी राव की स्कीम के पक्ष में हैं।
जेडीएस सुप्रीमो कुमारस्वामी कांग्रेस और भाजपा के असंतुष्ट नेताओं के संपर्क में भी हैं। खबरों के मुताबिक कुमारस्वामी इन नेताओं से जेडीएस में शामिल होने की अपील करते रहे हैं। पिछले दिनों बेल्लारी और रायचूर के 10 उम्मीदवारों को हैदराबाद में बीआरएस से जुड़ने के लिए वह अपने साथ ले गए थे।
जिन सात जिलों में जेडीएस और बीआरएस के गठबंधन की बातें हो रही हैं, इनमें कांग्रेस 18 और भाजपा 19 विधानसभा सीटें जीत चुकी है। कल्याण कर्नाटक (उत्तर कर्नाटक) पर नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इन सीमावर्ती जिलों के मतदाताओं को तेलंगाना सरकार की योजनाओं के बारे में अच्छे से पता है। ऐसे में नया विकल्प आजमाने के लिए यहां के वोटर जेडीएस-बीआरएस गठबंधन का समर्थन कर सकते हैं। बता दें कि जेडीएस कर्नाटक में पिछले विधानसभा चुनाव में 14.2% वोट के साथ 32 विधायकों को जिताने में सफल रही थी।
किन 41 सीटों पर मंथन कर रहे KCR और कुमारस्वामी
- बीदर उत्तर
- औरद
- भालकी
- बीदर दक्षिण
- हुमनाबाद
- बसवकल्याण
- गुलबर्गा दक्षिण
- गुलबर्गा ग्रामीण
- जेवारगी
- चित्तपुर
- सेदम
- चिंचोली
- आलंद
- अफजलपुर
- गुलबर्गा उत्तर
- यादगिरि
- गुरुमित्कल
- शाहपुर
- सुरपुरा
- देवदुर्गा
- लिंगासगुर
- मस्की
- रायचूर सिटी
- रायचूर ग्रामीण
- मानवी
- सिंधनूर
- कुस्तगी
- कनकगिरी
- गंगावती
- येलबुर्गा
- कोप्पला
- होसपेट
- हगरिबिम्मानहल्ली
- हुविनाहादगली
- हरपनहल्ली
- कुदल्गी
- संदुरु
- कांपली
- सिरुगुप्पा
- बेल्लारी सिटी
- बेल्लारी ग्रामीण












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