Jharkhand: डॉक्टरों-स्वास्थ्यकर्मियों पर किया हमला तो होगी 2 साल तक की जेल, देना होगा जुर्माना
jharkhand medical protection act: झारखंड स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों पर किया हमला तो होगी दो साल तक की जेल। देना होगा 50 हजार रुपए तक का जुर्माना। झारखंड कैबिनेट में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को मिली मंजूरी।

Jharkhand Cabinet Meeting: झारखंड में डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने और चिकित्सा संस्थानों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर दो साल तक की सजा और 50 हजार रुपए तक जुर्माना होगा। हेमंत सोरेन कैबिनेट ने बुधावर को झारखंड चिकित्सा सेवा से संबंद्ध व्यक्तियों, चिकित्सा सेवा संस्थान (हिंसा एवं संपत्ति नुकसान निवारण) विधेयक 2023 को मंजूरी दे दी है। अब इस विधानसभा के इसी बजट सत्र में पारित कराया जाएगा।
कानून बाने के बाद डॉक्टर स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई करने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अधिकतम दो वर्ष का कारावास व 50 हजार का जुर्माना लगाया जायेगा। यह संज्ञेय अपराध होगा, उसका अनुसंधान डीएसपी स्तर के पदाधिकारी करेंगे। अपराध का विचारण सक्षम स्तर के न्यायालय के द्वारा होगा। निजी चिकित्सा सेवा संस्थान को नुकसान पहुंचाने पर क्षतिपूर्ति भुगतान का भी प्रावधान किया गया है।
चिकित्सा एवं चिकित्सा सेवा संस्थाान द्वारा चिकित्सा नैतिकता का पालन करने और रोगी की चिकित्सा से संबंधित पूरी जानकारी देने का भी प्रावधान किया गया है। डॉक्टर और अस्पतालों को ओपीडी और वार्ड में भर्ती मरीजों को दी जानेवाली चिकित्सा की संपूर्ण जानकारी लिखित रूप में मरीज और उसके परिजनों को देनी होगी। अस्पताल के इलाज का खर्च या पैकेज (अनुमानित व्यय) की जानकारी सूचना पट्ट पर देना है मरीज के इलाज में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग का पालन करना है।
दुर्घटना के मरीजों के लिए अनिवार्य है मृत व्यक्ति के शव को बिना रोके परिजनों को सौंपना है, जिससे वह अंतिम संस्कार सुनिश्चित करा पाये। वहीं, पंजीकृत डॉक्टर व नर्स को नियुक्त करना होगा। इलाज में लापरवाही या गलत इलाज की दर्ज शिकायत की जांच उपायुक्त टीम गठित कर जांच करायेंगे। इलाज में लापरवाही की रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर प्रस्तुत करनी होगी। अस्पताल में सीसीटीवी कैमरा व संवेदनशील जगह पर सुरक्षा होगी। चिकित्सा सेवा संस्थान की निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष बनाना गया है।
अस्पताल व क्लिनिक परिसर में प्रवेश को नियंत्रित और प्रतिबंधित करने की व्यवस्था की गई है। गर्भवती महिला का इलाज कराना और बच्चे के जन्म के पूर्व और जन्म के बाद देखभाल करनी होगी।












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