विधायकों के वेतन पर हरियाणा सरकार ने गलती से भरा था इनकम टैक्स, अब लिया वापस
चंडीगढ़, 11 जुलाई। हरियाणा सरकार ने राज्य के विधायकों के वेतन पर गलती से अदा की गई आयकर की राशि को वापस ले लिया है। तीन पूर्व विधायकों को छोड़कर बाकी 137 विधायकों व पूर्व विधायकों से उनके वेतन पर सरकार द्वारा अदा की गई आयकर की 2.77 करोड़ रुपये की राशि वापस वसूल कर ली गई है। मौजूदा कानून में प्रविधान है कि विधायकों के केवल भत्तों पर ही राज्य सरकार द्वारा आयकर का भुगतान किया जा सकता है, जबकि प्रदेश सरकार ने 2010-11 से 2017-18 तक विधायकों के वेतन पर भी आयकर का भुगतान कर दिया था।

हरियाणा सरकार ने 12वीं और 13वीं विधानसभा के सदस्य रहे कुल 140 विधायकों व पूर्व विधायकों के वेतन पर 2.87 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान आयकर के रूप में किया है। तीन पूर्व विधायकों से 10 लाख रुपये की वसूली होनी अभी बाकी है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। हरियाणा विधानसभा सचिवालय की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार को एक आरटीआइ के जवाब में पूरी जानकारी मुहैया कराई गई है। गुरुग्राम के सोहना से विधायक रह चुके वर्तमान में भिवानी के भाजपा सांसद धर्मवीर पर चार लाख तीन हजार 746 रुपये की आयकर का राशि बकाया है।
फतेहाबाद के पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा पर चार लाख 49 हजार 393 रुपये, जबकि सिरसा जिले के रोड़ी हलके से पूर्व विधायक एवं पूर्व सांसद चरणजीत सिंह पर एक लाख 42 हजार 263 रुपये की राशि बकाया है। चार साल पहले 27 फरवरी 2018 को एडवोकेट हेमंत कुमार ने विधानसभा सचिवालय में आरटीआइ लगाकर विधायकों के वेतन पर सरकार की ओर से किए जाने वाले आयकर के भुगतान की पूरी जानकारी मांगी थी। शुरू में इस आरटीआइ के जवाब में विधानसभा सचिवालय की संबंधित शाखा ने स्वीकार किया कि गलती अथवा भूलचूक से विधायकों के वेतन पर भी आयकर का भुगतान वित्त वर्ष 2010-11 से लेकर 2017-18 तक किया जा चुका है। तब भुगतान की गई राशि का आंकड़ा 48 लाख 14 हजार 220 रुपये बताया गया था।
हेमंत कुमार ने इन आंकड़ों में झोल के चलते विधानसभा के डिप्टी सेक्रेटरी के पास प्रथम अपील दायर की। निजी सुनवाई में हेमंत ने आयकर की राशि की दोबारा से गणना कराने की मांग की। इसके बाद संशोधित जवाब में विधानसभा सचिवालय ने हेमंत कुमार को लिखित जवाब में कहा कि आयकर की यह राशि दो करोड़ 87 लाख 62 हजार 429 रुपये बनती है, जो विधायकों के वेतन पर इनकम टैक्स के रूप में सरकार द्वारा भरी गई है। विधानसभा सचिवालय ने जब यह राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू करनी चाही तो पूर्व विधायकों ने इसका विरोध किया, लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल इस धनराशि की वसूली के फैसले पर अडिग रहे। विधायकों से उनके मासिक वेतन/भत्तों से, जबकि पूर्व विधायकों से उनकी पेंशन राशि से यह वसूली की गई है।
एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि हरियाणा में विधायको को वेतन देने संबंधी प्रविधान अप्रैल 2011 में तत्कालीन भूपेंद्र हुड्डा सरकार ने किया था। हालांकि उसे पिछली तारीख अर्थात सात सितंबर 2010 से लागू किया गया। आरंभ में विधायकों का वेतन 10 हजार रुपये प्रतिमाह था, जो बढ़ते-बढ़ते आज 40 हजार रुपये प्रतिमाह हो चुका है। हरियाणा के मौजूदा तीन कानूनों में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के वेतन भत्तों दोनों पर आयकर का भुगतान प्रदेश सरकार द्वारा करने का प्रविधान है। हालांकि इसी कानून 1975 की धारा में विधायकों के केवल भत्तों पर ही सरकार द्वारा आयकर का भुगतान करने का उल्लेख है, मगर वेतन पर नहीं है। संसद के दोनों सदनों के सदस्यों (सांसदों) द्वारा भी उनके वेतन और भत्तों दोनों पर आयकर का भुगतान उनकी जेब से ही किया जाता है।












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