इस मामले में पंजाब को पीछे छोड़ नंबर वन बना आंध्र प्रदेश

अमरावती,11 नवंबर- हर राज्य में सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए तरह- तरह की योजनाएं चला रही है. कोई राज्य किसानों को अधिक से अधिक सब्सिडी दे रहा है तो कोई कृषि व्यवसाय खोलने के लिए लोन मुहैया करवा रहा है.

अमरावती,11 नवंबर- हर राज्य में सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए तरह- तरह की योजनाएं चला रही है. कोई राज्य किसानों को अधिक से अधिक सब्सिडी दे रहा है तो कोई कृषि व्यवसाय खोलने के लिए लोन मुहैया करवा रहा है. लेकिन आंध्र प्रदेश ने किसानों की हालत में सुधार लाने के लिए जो कदम उठा, वह रिकॉर्ड बन गया है. अब आंध्र प्रदेश पंजाब को पछाड़ते हुए किसानों को लोन देने के मामले में नंबर वन राज्य बन गया. आइए जानते हैं इस खास रिपोर्ट में कैसे हुआ संभव.

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दरअसल,नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) के दस साल के एक अध्ययन से इस बात का खुलासा हुआ है. नाबार्ड के अध्यम में कहा गया है कि आंध्र प्रदेश में देश में किसानों के लिए ऋण देने की दर सबसे अधिक है. अध्ययन के मुताबिक, दस साल से अधिक समय तक शीर्ष स्थान पर रहने वाला पंजाब अब फिसलकर दूसरे नंबर पर आ गया है. नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट ने 2011-12 और 2021-22 के बीच कृषि उद्योग के लिए ऋण संवितरण के आंकड़ों की जांच की.

बैंकों से ऋण की उच्च दर प्राप्त हो सकती है

शोध के अनुसार, आंध्र प्रदेश में सरकार ने किसानों की चिंता करने हुए उन्हें हर तरह से अलग- अलग योजनाओं के माध्यम से लोन देने की कोशिश की और उनकी यह मेहनत रंग लाई. यही वजह है कि आंध्र प्रदेश में किसानों को पंजाब में वितरित 1 लाख प्रति हेक्टेयर की तुलना में लगभग 129 लाख प्रति हेक्टेयर भूमि प्राप्त हुई. विश्लेषकों ने कहा कि आंध्र प्रदेश में किसानों को मिर्च, तंबाकू, कपास और हल्दी सहित नकदी-समृद्ध वाणिज्यिक फसलों की व्यापक खेती के परिणामस्वरूप बैंकों से ऋण की उच्च दर प्राप्त हो सकती है.

उच्चतम औसत राशि वाले प्रमुख चार राज्य थे

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल सबसे ज्यादा बकाया कर्ज और किसानों का कर्ज दक्षिण भारत से था. 2011 में, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में प्रति कृषि परिवार पर बकाया ऋण की उच्चतम औसत राशि वाले प्रमुख चार राज्य थे. जबकि प्रति कृषि परिवार ऋण का कुल औसत रु. 74,121, आंध्र प्रदेश और केरल में क्रमशः 2.45 लाख रुपये और 2.42 लाख रुपये हैं.

करोड़ों रुपये का कर्ज माफ किया

2019 के एनएसएस अध्ययन के अनुसार, "ग्रामीण भारत में कृषि परिवारों, भूमि और पशुधन की स्थिति का आकलन" शीर्षक से, दक्षिणी राज्यों में कृषि परिवारों पर अन्य प्रमुख राज्यों की तुलना में कृषि परिवारों की तुलना में काफी अधिक बकाया कर्ज था. एनएसएस के अध्ययन से पता चला है कि बैंकों, सहकारी समितियों और सरकारी संगठनों ने लगभग 69.6 प्रतिशत बकाया ऋण प्रदान किया, शेष 30.4 प्रतिशत गैर-संस्थागत स्रोतों से आया. वहीं, पंजाब में राज्य सरकार ने करोड़ों रुपये का कर्ज माफ किया.

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