Monsoon Session: गारंटी देता हूं केवल झारखंडियों को दूंगा रोजगार...विधानसभा में हेमंत सोरेन ने ऐसा क्यों कहा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को विधानसभा के मॉनसून सत्र के समापन अभिभाषण में कहा कि राज्य में 40 से 50 हजार पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया बढ़ चुकी है। वह इस बात की गारंटी देते हैं कि सिर्फ और सिर्फ झारखंडियों को ही रोजगार एवं स्वरोजगार देंगे। नियुक्ति में जो बाहरी आ रहे हैं, उन्हें रोका जाएगा। सीएम ने कहा कि वन संरक्षण नियमावली में पिछले वर्ष ग्रामसभा के अधिकार को छीन लिया गया और फिर लोकसभा में वन संरक्षण कानून में केंद्र ने ऐसे संशोधन किए कि भविष्य में आदिवासियों से उनका जंगल ही छिन जाएगा। पर उन्होंने न तो पिछले साल की नियमावली यहां लागू होने दी और न अभी हुए बदलाव को लागू करेंगे।
सीएम ने कहा कि मणिपुर में हजारों घर जला दिए गए, सैकड़ों की हत्या कर दी गई पर सरकार ने नाम मात्र के लिए केस किया है। वह भी सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद। उन्होंने कहा कि मणिपुर में आदिवासियों का उत्पीड़न हो रहा है और वहां की सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विस्थापन आयोग, एससी एवं एसटी आयोग का जल्द गठन करने जा रही है।

जातीय सर्वे के लिए कोर्ट के निर्णय का होगा अध्ययन
झारखंड सरकार पटना हाईकोर्ट के निर्णय के आलोक में जातीय सर्वे पर विचार कर रही है। हेमंत सरकार राज्य में जातीय सर्वे का विचार रखती है। संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने यह जानकारी सदन में दी।
झारखंड स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक 2023 विधेयक को शुक्रवार को विधानसभा से मंजूरी मिल गई। विधेयक को स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने सदन में पेश किया था।
सुभाष मुंडा की हत्या से दुखी और मर्माहत हूं
मुख्यमंत्री ने सुभाष मुंडा की हत्या को लेकर कहा कि वह मर्माहत हैं। घटना में शामिल अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन, मोनू मानेसर को हरियाणा पुलिस क्यों नहीं गिरफ्तार कर पा रही है। सीएम ने कहा कि उनकी सरकार अपराध पर पूर्ण नियंत्रण के लिए कटिबद्ध है। डीजीपी को हमने साफ कह रखा है कि अपराध पर हर हाल में लगाम लगाएं।
आजसू अध्यक्ष सुदेश ने चतुराई से सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन नियुक्तियां निकल रही हैं। इन लोगों ने बड़ी चतुराई से साठ चालीस का नारा लगाकर नौजवानों को गुमराह किया, समाज में जहर बोया। सरकार की स्पष्ट सोच थी की 100 प्रतिशत स्थानीय लोगों की नियुक्ति हो। सदन से विधेयक पारित हुआ, लेकिन राज्यपाल के पास जाकर उलझ गया। ऐसा फंसा कि हम अब तक उस पर आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। हमारी मंशा 1932 आधारित स्थानीयता नीति लागू करने की है। इसे लागू करेंगे। फिर से विधेयक सदन में लाएंगे।












Click it and Unblock the Notifications