धरणी पोर्टल ने तेलंगाना के किसानों के आजीविका को कैसे प्रभावित किया? जिसने बीआरएस को भी प्रभावित
तेलंगाना विधानसभा चुनाव परिणाम 3 दिसंबर को घोषित होने वाले हैं। वहीं अपनी जीत को लेकर आश्वस्त कांग्रेस ने चुनाव के दौरान ही भूमि घोषणा पोस्टर का अनावरण किया था। इसके साथ ही बीआरएस सरकार की एकीकृत भूमि रिकॉफर्ड प्रबंधन प्रणाणी धरणीन को एक कंम्पयूटर अधारित त्रुटि मुक्त रिकॉर्ड के साथ परिवर्तित करने की कसमद खाई थी। जो भूमि की वास्तिवक स्थिति को दर्शाने के साथ सभी के लिए सुलभ है। वहीं दूसरी ओर बीआर ने पोर्टल का समर्थन किया इसकी सुरक्षा को वचन दिया है।

अगर तेलंगाना राज्य की कुल आबादी में ग्रामीण क्षेत्र में रहने वालों की बात की जाएं तो यहां का 61.12 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते है और इस आबादी का तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा अपनी आजीविका, पूर्ण या आंशिक रूप से, भूमि के जरिए ही मिलती हैं। इन सभी किसानों के लिए जमीन का मालिक होना गर्व, सुरक्षा और आजीविका का विषय है।
हालांकि छोटी-मोटी मुद्रण संबंधी त्रुटियों, तकनीकी गड़बड़ियों और आधे-अधूरे सर्वेक्षण ने, सुरक्षा और आजीविका को प्रभावित किया है।
नागरकर्नूल जिले के ग्रामीण कोल्लापुर के कलावारा चिन्नागुट्टल्या ने अपनी युवावस्था के दौरान ने किसानी छोड़ दी थी। 78 साल की उम्र में किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलने के कारण वह सिलाई के काम में लौट आई हैं। इसके अतिरिक्त, वह अब अपनी जमीन पर किरायेदार है।
उन्होंने अपना अनुभव शेयर करते हुए मीडिया को बताया कि
मैंने 2001 में जमीनी खरीदी, उप-रजिस्ट्री कार्यालय गया और बिक्रीनामा करवाया। बाद में, मैंने मंडल कार्यालय में सभी दस्तावेज जमा कर दिए, लेकिन उन्होंने मुझसे रिश्वत मांगी। मैंने उन्हें रिश्वत देने से इनकार कर दिया लेकिन अपने रिकॉर्ड जमा कर दिए और घर लौट आया। मैं आश्वस्त था क्योंकि मेरे पास बिक्री विलेख और समझौते के कागजात थे।












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