Jharkhand Politics: जगरनाथ महतो की विरासत संभालेंगी उनकी पत्नी, CM हेमंत सोरेन ने बनाया प्लान
दरअसल, साममाजिक गठबंधन और शिबू सोरेन के मार्गदर्शन व हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो ने विधानसभा चुनाव 2019 में 30 सीटों पर जीत हासिल की थी।

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने जगरनाथ महतो के रूप में कुरमी समाज का अपना एक सशक्त नेता खोया है। इसकी भरपाई पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए बड़ी चुनौती के रूप में सामने खड़ी हो गई है। पार्टी सूत्रों की मानें तो दिवंगत जगरनाथ महतो की उत्तराधिकारी उनकी पत्नी बेवी देवी होंगी।
विधानसभा क्षेत्र डुमरी के उप चुनाव में झामुमो उन्हें चुनाव मैदान में उतारेगा। उनके बेटे की उम्र 25 वर्ष से कम है और उपचुनाव होने तक भी वह 25 की उम्र तक नहीं पहुंच पाएगा। दूसरा अहम सवाल यह भी है कि जगरनाथ महतो के निधन के बाद स्कूली शिक्षा विभाग और उत्पाद विभाग किसे सौंपा जायेगा?
यह बात सही है कि महतो समाज की आबादी राज्य में करीब 14 फीसदी है, लेकिन आज झामुमो जिस सामाजिक गठजोड़ की बुनियाद पर सियासत कर रहा है उसमें महतो समाज के साथ मांझी और मुस्लिम के जुड़ाव को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में मंत्रिमंडल में महतो, मांझी या मुस्लिम चेहरे में से किसी की इंट्री की संभावना बढ़ गई है।
रिक्त विभागों का नेतृत्व सौंपने पर जल्द निर्णय लेंगे सीएम
माना जाता है कि इसी सोशल इंजीनियरिंग और गुरुजी शिबू सोरेन के मार्गदर्शन व हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो ने विधानसभा चुनाव 2019 में 30 सीटों पर जीत हासिल की थी। चर्चा यह भी है कि पिछली बार जगरनाथ महतो की लंबी बीमार और लंग्स प्रत्यारोपरण के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद ही शिक्षा विभाग की कमान संभाली थी। इसे दोहराने पर भी मंथन चल रहा है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। झामुमो सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रिक्त हुए विभागों का नेतृत्व सौंपने पर जल्द निर्णय ले लेंगे। सूत्रों के अनुसार मंत्रियों के पोर्टफोलियो पर भी मंथन हो सकता है।
5वीं विधानसभा में छठी बार होगा उपचुनाव
पंचम झारखंड विधानसभा में अब छठी सीट पर उप चुनाव होगा। अब तक दुमका, बेरमो, मधुपुर, मांडर और रामगढ़ विधानसभा के लिए उप चुनाव हो चुके हैं। मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद मधुपुर सीट पर उपचुनाव में उनके बेटे हफिजुल हसन जीते। हालांकि हफिजुल पर बड़ा फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें पहले ही मंत्री का पोटफॉलियो दे दिया था। इस बार भी हेमंत का मास्टर स्ट्रोक देखने को मिल सकता है।












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