Hemant विधानसभा सभागार में बोले- संवैधानिक संस्थाओं को किसकी सरकार है, इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए
रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड को बने 23 साल पूरे होने जा रहे हैं। नया राज्य होने की वजह से झारखंड विधानसभा को विधायिका का बहुत लंबा अनुभव नहीं है। यह बेहद जरूरी है कि विधायिका और कार्यपालिका बेहतर समन्वय और तालमेल के साथ कार्य करें, ताकि आम जनता को इसका लाभ आम मिल सके।
उन्होंने कहा कि हम जनप्रतिनिधि चुनाव जीतकर आते हैं और सरकार बनाते हैं, लेकिन कुछ व्यवस्थाएं स्थायी तौर पर कार्य करती हैं। इन स्थायी व्यवस्थाओं एवं संस्थाओं को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए कि राज्य में सरकार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से चलती रहें, इसके लिए चिंतन करने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को झारखंड विधानसभा सभागार में विधि निर्माण की प्रक्रिया एवं कार्यपालिका का दायित्व विषय पर आयोजित त्रिदिवसीय प्रशिक्षण सेमिनार के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि छोटी-छोटी वजहों से किसी विधेयक या कानून का पारित नहीं होना चिंता का विषय है। देश के संविधान में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को अलग-अलग अधिकार दिए गए हैं।
विधायिका देश एवं राज्य के लोगों के कल्याण के लिए विधेयक पारित करने, संशोधन प्रस्ताव लाने, नियम-कानून बनाने और नीति निर्धारण सहित कई कार्य करती है। कार्यपालिका सरकार के इन नियम-कानून, नीतियों और कार्यक्रमों को लागू करती है। न्यायपालिका कानूनों की व्याख्या एवं लोगों को न्याय प्रदान करती है।
पहले स्तर पर स्थायी कार्यपालिका एवं सिविल सेवा, राजनीतिक कार्यपालिका एवं मंत्रिपरिषद के प्रति उत्तरदायी होता है। दूसरे स्तर पर मंत्रिपरिषद विधायिका को उत्तरदायी होती है और अंतिम एवं तीसरे स्तर पर विधायिका आम जनता के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसमें अंतिम संप्रभुता वास करती है।












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