हरियाणा सरकार सीएनजी, पीएनजी विकास हेतु राईट ऑफ यूज नीति करेगी लागू
हरियाणा सरकार प्रदेश में सीएनजी और पीएनजी के बुनियादी ढांचे के विकास हेतु एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उपयोग का अधिकार (राइट ऑफ यूज) और रास्ते का अधिकार (राईट ऑफ वे) नीति लागू करने जा रही है। इस नीति का उद्देश्य सीएनजी और पीएनजी वितरण नेटवर्क की सुचारू स्थापना को सुविधाजनक बनाना है।
यह जानकारी मुख्य सचिव संजीव कौशल की अध्यक्षता में आज यहां प्रदेशभर में कंप्रेस्ड प्राकृतिक गैस (सीएनजी) और पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी) के बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने के लिए हुई समीक्षा बैठक में दी गई।

कौशल ने संबंधित अधिकारियों को स्वीकृत/निर्धारित मात्रा में ईंधन का उपयोग नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण करने और गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिये।
बैठक में बताया गया कि वर्तमान में कुल 632 औद्योगिक इकाइयों ने गैस को अपने ईंधन विकल्प के रूप में अपनाया है, जिनमें से 257 औद्योगिक क्षेत्र में प्रयोग कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, औद्योगिक क्षेत्र में 403 औद्योगिक इकाइयां वर्तमान में स्वीकृत वैकल्पिक ईंधन का उपयोग कर रही हैं।
मुख्य सचिव ने सीएनजी, पीएनजी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी हेतु राज्य स्तरीय शीर्ष निगरानी समिति के गठन की घोषणा की। इस समिति में उद्योग एवं वाणिज्य और शहरी विकास एवं स्थानीय निकाय विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
कौशल ने परिचालन दक्षता को बढ़ाने हेतु अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि निश्चित समय सीमा के भीतर सीएनजी और पीएनजी पाइप लाइन स्थापना हेतु आरओडब्ल्यू व आरओयू की प्रक्रियाओं के लिए एक ऑनलाइन सेवा मॉड्यूल लॉन्च किया जाए। इस डिजिटल नवाचार का उद्देश्य प्रक्रियात्मक जटिलताओं में सुगमता लाना है।
उन्होंने कहा कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का मसौदा तैयार किया गया और इसमें सुधार हेतु संबंधित दस विभागों से फीडबैक और टिप्पणियां मांगी गई। इन फीडबैक में सात विशिष्ट पहलुओं को केंद्रित किया गया, जिनमें फॉर्म, दस्तावेज़ चेकलिस्ट, आरओडब्ल्यू व आरओयू के लिए लागू प्रसंस्करण शुल्क, लीजहोल्ड अधिकार, अनुमोदन और डीम्ड अनुमोदन दोनों के लिए प्रस्तावित समयरेखा, ऑनलाइन ऑटो-जनरेशन के लिए प्रमाणपत्र टेम्पलेट, ट्रैकिंग, निगरानी और एमआईएस डैशबोर्ड शामिल हैं।
संजीव कौशल ने कहा कि सीएनजी, पीएनजी के फायदों के बारे में जागरूकता लाने के लिए जिलावार विशिष्ट सेमिनार और कार्यशालाओं के आयोजन के बारे एक योजना बनाई जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित करने के लिए उचित कार्यक्रम निर्धारित करने के निर्देश दिए।












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