हरियाणा सरकार की नई लैंड पॉलिसी से बढ़ेगी विकास की रफ्तार, लैंड बैंक बनाने का रास्ता साफ

चंडीगढ़, सितंबर 10। विकास परियोजनाओं के लिए जमीन की कमी से जूझ रही हरियाणा सरकार ने अब लैंड पूलिंग पालिसी की शुरुआत की है। नई पालिसी के तहत, शहरों में नए सेक्टर बनाने, वाणिज्यिक, संस्थागत और ढांचागत विकास के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने में मदद मिलेगी।

manohar lal khattar

परियोजनाओं के लिए भूमालिक को पोर्टल पर खुद जमीन देने की पेशकश करनी होगी। नगर एवं आयोजना विभाग के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता की ओर से नई पालिसी की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इससे शहरीकरण और औद्योगीकरण के लिए लैंड बैंक बनाने में मदद मिलेगी।

एन्हांसमेंट (भूमि का बढ़ा मुआवजा) और अधिगृहीत जमीन के लिए आए दिन होने वाले धरने-प्रदर्शनों से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने यह पालिसी बनाई है। लैंड पूलिंग पालिसी में खास बात यह है कि भूमि मालिक विकास प्रक्रिया में भागीदार होंगे।

भूमि के आवंटन को रिक्त भूमि (रा लैंड) की लागत से जोड़कर उन्हें अधिकतम लाभ दिया जाएगा। नीति के तहत हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) शहर के अंदर आवासीय, वाणिज्यिक, संस्थागत और बुनियादी ढांचे का विकास करेगा। इसी तरह हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एचएसआइआइडीसी) प्रदेश में कहीं भी औद्योगिक, बुनियादी ढांचे या संस्थागत उद्देश्यों के लिए विकास कार्य करेगा। इतना ही नहीं, कोई भी विभाग या बोर्ड- निगम या प्रदेश सरकार के स्वामित्व और नियंत्रण वाले संगठन भी विकास परियोजनाओं को सिरे चढ़ा सकेंगे।

नई नीति के तहत डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन द्वारा भू-स्वामियों को एक भूमि अधिकार प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा जो ट्रेड या मोर्टगेज रखा जा सकता है। नीति के तहत कोई भी भूमि मालिक या तो सीधे या एक एग्रीगेटर के माध्यम से प्रकाशन में निर्दिष्ट अवधि के भीतर विकास परियोजना के लिए भूमि की पेशकश करने के लिए आवेदन जमा कर सकता है। आवेदन के लिए कोई शुल्क नहीं होगा।

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