वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर सीएम खट्टर ने दी श्रद्धांजलि, कही ये बात
Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 1857 में शुरू हुई प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाली वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई को उनकी जयंती पर नमन किया।
हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल पर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की एक तस्वीर पोस्ट की है। साथ ही, उन्होंने लिखा, वाराणसी की पावन धरा पर जन्मी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन।

इतना ही नहीं, सीएम खट्टर ने आगे लिखा कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मां भारती के लिए सर्वस्व न्योछावर कर उन्होंने राष्ट्र की मातृशक्ति को क्रान्ति के महायज्ञ में बलिदान की आहुति डालने के लिए प्रेरित किया। उनकी देशभक्ति, बलिदान और शौर्य से सदैव देशवासियों को प्रेरणा मिलती रहेगी।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। पीएम मोदी ने कहा भारतीय नारीशक्ति के पराक्रम की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई को उनकी जन्म-जयंती पर मेरा कोटि-कोटि नमन। विदेशी हुकूमत के अत्याचार के खिलाफ उनके साहस, संघर्ष और बलिदान की गाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।
बता दें, रानी लक्ष्मीबाई ने पहले स्वतंत्रता संग्राम 1857 में अहम भूमिका निभाई थी। रानी लक्ष्मी बाई ने इस संग्राम में अपने अदम्य साहस का परिचय दिया था। रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 में बनारस के एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था, जिन्हें प्यार से मनु बुलाया जाता था।
1842 में मनु की शादी झांसी के महाराजा गंगाधर राव नेवलेकर से कर दी गई। शादी के बाद मणिकर्णिका का नाम लक्ष्मीबाई पड़ा था। रानी लक्ष्मीबाई ग्वालियर में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों के साथ लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। दरअसल, झांसी के महाराजा की मृत्यु के समय भारत में ब्रिटिश इंडिया कंपनी का वायसराय डलहौजी थी, झांसी पर कब्जा करना चाहते थे।
इतना ही नहीं, अंग्रेजों ने रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र को वारिस मानने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठा लिया और जंग के मैदान में डटकर उनका सामना करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी।












Click it and Unblock the Notifications