हरियाणा: सीएम खट्टर बोले- आलोचनाओं से नहीं डरते, जारी रखेंगे व्यवस्था परिवर्तन
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि राज्य सरकार लगातार भौतिक विकास के साथ-साथ सामाजिक सुधार के काम भी कर रही है। हम विपक्ष की आलोचनाओं से नहीं डरते हैं, बल्कि हमारे व्यवस्था परिवर्तन के काम लगातार जारी रहेंगे।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि राज्य सरकार लगातार भौतिक विकास के साथ-साथ सामाजिक सुधार के काम भी कर रही है। हम विपक्ष की आलोचनाओं से नहीं डरते हैं, बल्कि हमारे व्यवस्था परिवर्तन के काम लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष कर्ज के आंकड़ों को गलत बताता है, जबकि वर्तमान में कर्ज घटा है। उन्होंने कहा कि पब्लिक डेब्ट यानी कर्ज के अंदर तीन मद शामिल होते हैं। विपक्ष इन सभी मदों को एक साथ मिलाकर कर्ज के आंकड़े बताता है, जो सही नहीं है। मंगलवार को विधानसभा में बजट चर्चा पर अपना जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि 2014-15 में स्टेट पब्लिक इंटरप्राइजेज के तहत कर्ज 69,922 करोड़ रुपये था, जबकि वर्ष 2021-22 में 47,211 करोड़ रुपये है। वर्तमान में कर्ज घटा है। उन्होंने कहा कि हमारी जीएसडीपी लगातार बढ़ रही है और वर्तमान में यह लभगग 10 लाख करोड़ तक हो गई है।
8 साल में दी एक लाख से अधिक नौकरी
प्रदेश में बेरोजगारी और युवाओं को रोजगार के मुद्दे पर मंगलवार को विधानसभा में काफी गरमा-गरमी देखने को मिली। आमतौर पर मुख्यमंत्री के विभागों से जुड़े सवालों के जवाब संसदीय कार्य मंत्री या दूसरे मंत्री देते रहे हैं, लेकिन मंगलवार को सीएम ने खुद ही मोर्चा संभाला। रेवाड़ी विधायक चिरंजीव राव ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने सीएमआईई की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी दर 30 प्रतिशत से भी अधिक है। जवाब में सीएम ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी की दर पहले से कम हुई है। फरवरी-2023 में रोजगार कार्यालयों में दर्ज आवेदकों की संख्या 6 लाख 46 हजार है, जबकि दिसंबर-2014 में यह 7 लाख 86 हजार थी। सरकार द्वारा युवाओं को रोजगार मुहैया करवाने के अथक प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी नौकरियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया करवाए हैं। उन्होंने सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम कार्यान्वय मंत्रालय द्वारा पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) की रिपोर्ट भी सदन में रखी।
विकास कार्यों की मंजूरी के लिए तय हो अधिकारियों की जवाबदेही
विकास कार्यों से जुड़े प्रोजेक्ट की मंजूरी में होने वाली देरी और सरकार की घोषणाओं के बाद भी समय पर काम नहीं होने का मुद्दा मंगलवार को विधानसभा में गरमाया रहा। बादशाहपुर से निर्दलीय विधायक राकेश दौलताबाद ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की मंजूरी के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। सदन में मौजूद अधिकांश विधायक और स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता तक उनकी बातों से सहमत थे, लेकिन कोई भी राकेश दौलताबाद के पक्ष में बोला नहीं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने जवाब में कहा कि सरकार समय-समय पर सिविल सुधारों के लिए निर्देश जारी करती है। दौलताबाद ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी विकास कार्य होता है तो उसकी फाइल विभाग के 10 अधिकारियों के पास जाती है। पहले स्थानीय स्तर पर जेई से लेकर नगर निगम आयुक्त तक के पास फाइल जाती है। इसके बाद मुख्यालय में कम से कम चार आईएएस अधिकारियों के पास यह फाइल जाती है। इस चैनल को कम किया जा सकता हैै ताकि विकास कार्यों में बेवजह की देरी न हो। उन्होंने कहा कि वे अकेले नहीं बल्कि हर विधायक इससे परेशान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ग्रुप-ए, बी, सी और डी से संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की सेवा शर्तों को शासित करने के लिए विभिन्न नियम बनाए हैं। सिविल सेवाओं में सुधार के लिए समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। बोर्ड-निगमों और विभागों में पदानुक्रम स्तर निर्धारित करने के लिए समय-समय पर प्राप्त प्रस्तावों की सरकार जांच करती है।
लोकल ऑडिट सिस्टम को करेंगे मजबूत
सीएम ने कहा कि राज्य सरकार पंचायती राज संस्थाओं व नगर निकायों को स्वायत्त करने की ओर अग्रसर है। वे अपना बजट खुद बनायेंगे और स्वयं खर्च करेंगे। केंद्र व राज्य वित्त आयोग से मिलने वाले पैसे मिलते रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार लोकल ऑडिट सिस्टम को प्रभावी बना रही है। जनता का जो भी पैसा विकास कार्यों पर खर्च होगा, उन सभी का ऑडिट किया जाएगा।












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