सरकार के प्रभावी जल संसाधन विकास और प्रबंधन की बदौलत सरप्लस पानी के मामले में तेलंगाना नंबर वन पर
देश के ज्यादातर राज्य जलाशयों की संख्या तेजी से घटने के कारण संघर्ष कर रहे हैं वहीं तेलंगाना अकेला ऐसा राज्य बन चुका है जो पानी की उपलब्धता के मामले में बेहतर स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसा तेलंगाना के जल स्रोतो में पर्याप्त जल भंडारण के कारण संभव हुआ है।

तेलंगाना के कृष्णा बेसिन से संबंधित सभी प्रोजेक्ट में शून्य प्रवाह प्राप्त करने वाले तेलंगाना की सरकार ने पिछले नौ सालों में जल संसाधन विकास और प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया। इस पर फोकस किया जिसकी बदौलत सितंबर 2023 में राज्य में पानी की उपलब्धता में राहत मिली। कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना वह प्रमुख स्रोत ने मानूसन के पहले कई सूखते जलाशयों को लबालब पानी से भी दिया था।
सीडब्ल्यूसी की रिपार्ट में टॉप पांच राज्यों में नंबर वन पर तेलंगाना
21 राज्यों का जलाशय डेटा केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) प्रकाशित करता है। इस डेटा में पांच राज्यों को छोड़कर सभी राज्य घाटे में है। जिन राज्यों को लाभ में दिखाया गया है उन पांचा राज्यों में तेलंगाना में 68.3 प्रतिशत अधिशेष जल यानी सरप्लस वॉटर के साथ नंबर वन पर है। तेलंगाना इस सरप्लस पानी के मामले में गुजरात और उत्तराखंड की तुलना में काफी आगे है। गुजरात में 14.6 प्रतिशत और उत्तराखंड में 12.1 प्रतिशत का मामूली अधिशेष दर्ज किया है।वहीं सीडब्लू सी की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश और नागालैंड राज्यों में 6.0 प्रतिशत और 2.7 प्रतिशत का अधिशेष जल है।
घाटे वाले राज्यों में बिहार नबंबर वन पर
सरप्लस वॉटर के घाटे वाले राज्यों में -77.1% के साथ बिहार नंबर वन पर है। बिहार के बाद तमिलनाडु 57.4 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल 44.3 प्रतिशत के साथ घाटे में हैं। वहीं तेलंगाना जहां नंबर वन पर है वहीं उसका पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश जिससे तेलंगाना अलग होकर अलग राज्य के रूप में आसित्व में आया उसी आंध्र प्रदेश के जलाशयों के जल स्तर में 10 वर्षों के सामान्य औसत की तुलना में -44 प्रतिशत की गिरावट आई है।












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