'बीआरएस केवल ओवैसी की सलाह पर बढ़ाती है कदम', सीएम केसीआर पर बीजेपी का बड़ा हमला
तेलंगाना में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच राजनीतिक दलों के नेताओं के तीखे बयान सामने आ रहे हैं। भारत राष्ट्र समिति (BRS) पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि तेलंगाना सरकार केवल एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी की सलाह पर ही काम करती है।
सीएम केसीआर के बयानों पर बीजेपी प्रमुख ने कहा कि भाजपा को केटीआर या फिर केसीआर के प्रमाणपत्र आवश्यकता नहीं है। सिर्फ तेलंगाना के लोगों के ओर से दिए जाने वाले सर्टिफिकेट की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि इस बार बीजेपी के साथ तेलंगाना की जनता है।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन को लेकर बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि सीएम केसीआर केवल अपने सलाहकार एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के साथ आगे बढ़ने के बारे में सोचते हैं।
रेड्डी ने कहा "बीआरएस पार्टी महिलाओं के महत्व को नहीं जानती है। पहले पांच वर्षों में, बीआरएस पार्टी ने एक महिला मंत्री के बिना राज्य पर शासन किया। विधायक उम्मीदवारों की नई घोषित सूची में कितनी महिलाएं हैं? केसीआर सरकार केवल राजनीति और वोटों के लिए काम करती है, लोगों के लिए काम नहीं करती। वे सिर्फ यही सोचते हैं कि अपने सलाहकार असदुद्दीन औवेसी के साथ आगे कैसे बढ़ना है।"
सीएम केसीआर के उस बयान पर भी भाजपा नेता रेड्डी ने पलटवार किया जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्र ने तेलंगाना को फंड में देने में समानता नहीं दिखाई। जी किशन रेड्डी ने कहा कि पिछले नौ साल में केंद्र सरकार ने तेलंगाना को 9 लाख करोड़ रुपये दिये हैं।
बता दें के तेलंगानी की बीआरएस सरकार ने दावा किया है कि अन्य राज्यों की अपेक्षा केंद्र ने तेलंगाना को बहुत कम फंड दिया है। सरकार ने एक आंकड़ा जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि तेलंगाना को केंद्र से मिलने वाला अनुदान अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।
बीआरएस सरकार के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना काल के वर्षों को छोड़ दिया जाए तो पिछले 9 वर्षों में 2021-22 और 2022-23 के वर्षों में राज्य को केंद्र सरकार की ओर काफी कम सहायता मिली है। जबकि चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले पांच महीनों में तेलंगाना को मात्र 2,137 करोड़ रुपये यानी बजट अनुमान 41,259 करोड़ रुपये का पांच प्रतिशत प्राप्त हुआ। यह, 2014 में राज्य गठन के बाद से बजट अनुमान के मुकाबले प्राप्त अनुदान सहायता निधि का अब तक का सबसे कम प्रतिशत है।












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