हिमंत से लेकर सिंधिया, आजाद और अब मनप्रीत बादल, कांग्रेस से क्यों हो रहा बड़े नेताओं का मोहभंग?

मनप्रीत सिंह बादल ने ऐसे समय कांग्रेस छोड़ी है जब एक दिन पहले ही पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मौजूदा सांसद राहुल गांधी की अगुवाई वाली 'भारत जोड़ो यात्रा' पंजाब से हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो रही थी।

punjab

चंडीगढ़ः पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने बुधवार (18 जनवरी) को कांग्रेस का हाथ छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच 'गुटबाजी' को उन्होंने कांग्रेस छोड़ने की वजह बताया। मनप्रीत सिंह बादल ने ऐसे समय कांग्रेस छोड़ी है जब एक दिन पहले ही पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मौजूदा सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की अगुवाई वाली 'भारत जोड़ो यात्रा' (Bharat Jodo Yatra) पंजाब से हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो रही थी।

राहुल गांधी को लिखे एक पत्र में, मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि दिल्ली में बैठे नेताओं की एक मंडली पंजाब में मामलों को चला रही है और इससे केवल गुटबाजी बढ़ी है। इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और बुधवार को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। इसी के साथ उनकी गिनती ऐसे शीर्ष नेताओं में भी हो गई जिन्होंने कांग्रेस को अलविदा कहा और जिनमें से कई ने बीजेपी ज्वाइन की।

इन नेताओं का हुआ कांग्रेस से मोहभंग

कांग्रेस छोड़ने वाले शीर्ष नेताओं की फेहरिस्त में हिमंत बिस्वा सरमा (जिन्होंने 2015 में पार्टी छोड़ी), गुलाम नबी आजाद (जिन्होंने पिछले सितंबर में कांग्रेस छोड़ी), ज्योतिरादित्य सिंधिया, कपिल सिब्बल, अश्विनी कुमार, आरपीएन सिंह, जितिन प्रसाद, सुष्मिता देव, सुनील जाखड़, हार्दिक पटेल, एन बीरेन सिंह, पेमा खांडू, पीसी चाको और जयवीर शेरगिल जैसे दिग्गजों के नाम शामिल हैं।

इस फेहरिस्त में शामिल शीर्ष नेताओं समेत जितने भी लोगों ने कांग्रेस पार्टी का हाथ छोड़ा है, उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तरह-तरह के आरोप लगाए। किसी ने गांधी परिवार पर नेताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया तो किसी ने पार्टी में गुटबाजी का। किसी ने सीधे राहुल गांधी को मनमानी करने का दोषी ठहरा दिया।

हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस क्यों छोड़ी?

2015 में सोनिया गांधी को लिखे पत्र में हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी को अहंकारी बताते हुए कहा था कि पार्टी गांधी परिवार की निरंकुश राजनीति को बढ़ावा देती है जिसने असम के लोगों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने राहुल गांधी पर मुख्यमंत्रियों को बदलने के लिए विशेषाधिकार रखने का आरोप लगाया था और कहा था कि उनका और उनकी पत्नी का अपमान किया गया। सरमा इसके बाद बीजेपी में शामिल हो गए थे और आज असम के मुख्यमंत्री हैं।

5 दशक तक जुड़े रहे गुलाम नबी आजाद कांग्रेस से क्यों गए?

गुलाम नबी आजाद ने पिछले साल 2022 सितंबर में कांग्रेस से पांच दशक पुराना नाता तोड़ लिया था। उन्होंने सोनिया गांधी को पांच पन्नों का इस्तीफा पत्र लिखा था, जिसने काफी सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी बनाई, जिसे जम्मू-कश्मीर इकाई के कई नेताओं ने ज्वाइन किया। आजाद ने अपने इस्तीफा पत्र में आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने राजनीति में आने के बाद कांग्रेस के पूरे परामर्श तंत्र का ध्वस्त कर दिया, खासकर तब जब सोनिया गांधी ने उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया था। बता दें कि राहुल गांधी 2017 से 2019 तक यानी केवल दो वर्ष तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे थे।

कपिल सिब्बल ने बताई थी ये वजह

कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया था पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाने जैसे सभी फैसले राहुल गांधी लेते हैं, इस रुख की वजह से सुनील जाखड़ ने पार्टी छोड़ी, यह तब है जब वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं हैं।

चार दशक से ज्यादा समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे अश्विनी कुमार ने आरोप लगाया था कि पार्टी ने जमीनी सच्चाई से संपर्क खो दिया है। अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने पर उन्होंने गांधी परिवार की तीखी आलोचना की थी। अमरिंदर सिंह के कट्टर विरोधी नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब चुनाव से पहले राज्य कांग्रेस का प्रमुख बनाना, इसे राहुल गांधी के फैसले के रूप में देखा गया था।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का कांग्रेस से जाने का कारण क्या था?

2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ की ओर से जनता से किए गए वादों को पूरा न करने को पार्टी से अपने मोहभंग का कारण बताया था लेकिन राजनीतिक जानकारों ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व की ओर से सिंधिया की अनदेखी हो रही थी, वह दिल्ली जाना चाहते थे लेकिन राज्यसभा सीट का कोई स्पष्ट वादा नहीं था। वहीं, कुछ जानकारों ने माना था कि सिंधिया मध्य प्रदेश में सीएम न बनाए जाने से खफा थे।

सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ी तो कुछ विधायक भी उनके साथ आ गए और बीजेपी में शामिल हो गए। इससे राज्य की कमान कांग्रेस के हाथ से छूट गई और बीजेपी ने फिर से सरकार बना ली। कांग्रेस छोड़ने वाले इन नेताओं के बयानों की समीक्षा की जाए तो निष्कर्ष यही निकलता है कि पार्टी को हर नेता की भूमिका के स्तर पर आत्ममंथन करने की जरूरत है।

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