डिप्टी सीएम दुष्यंत की रैली रही कामयाब, भाजपा के पाले में डाली गठबंधन की गेंद

Deputy CM Dushyants rally was successful, put the ball of alliance in BJPs court

जननायक जनता पार्टी (जजपा) के स्थापना दिवस के मौके पर शुक्रवार को भिवानी में कामयाब रैली कर डिप्टी सीएम दुष्यंत सिंह चौटाला ने अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास करवाया। वे यह बताने और जताने में कामयाब रहे कि न तो जजपा कमजोर हुई है और न ही उनका काडर उनसे दूर हुआ है। पिछले साल इसी दिन झज्जर में स्थापना दिवस के मौके पर हुई रैली से भिवानी रैली में तीन गुणा अधिक भीड़ जुटाकर दुष्यंत ने अपने राजनीतिक विरोधियों के साथ-साथ सत्तारूढ़ भाजपा को भी स्पष्ट संदेश दे दिया।

गठबंधन की गेंद पूरी तरह से भाजपा के पाले में डालते हुए दुष्यंत ने स्पष्ट कर दिया कि वे आगे भी मिलकर राजनीति करने को तैयार हैं। बशर्ते भाजपा भी इसमें भागीदार हो। ऐसा नहीं होने की सूरत में उन्होंने 2024 में अपने दम पर लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत भी साफ दे दिए। रैली में जुड़ी भीड़ और तीनों पिता-पुत्रों (डॉ़ अजय सिंह चौटाला, दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय सिंह चौटाला) की बॉडी लैंग्वेज यह बताने के लिए काफी थी कि वे रैली में जुटी भीड़ से पूरी तरह से संतुष्ट हैं।

इस रैली को लेकर उनके विरोधी लम्बे समय से कई तरह के प्रचार कर रहे थे। इनेलो से अलग होकर 9 दिसंबर, 2018 को दुष्यंत ने जींद में जजपा का गठन किया था। पार्टी के गठन को चार साल पूरे हो चुके हैं। अहम बात यह है कि जजपा को भाजपा के साथ सत्तासीन हुए भी तीन साल से अधिक का समय हो चुका है। इस दौरान अपने कई चुनावी वादों को पूरा करवाने में जजपा नेतृत्व कामयाब भी रहा है। कई वादों पर काम चल रहा है। दुष्यंत ने अपने सम्बोधन में स्पष्ट कर दिया कि आने वाले दिनों में वे चुनावी वादों को लेकर भाजपा पर दबाव भी बनाएंगे। अब चूंकि चुनावों में बहुत अधिक समय नहीं बचा है। ऐसे में जजपा हरसंभव कोशिश करेगी कि लोगों से किए अधिक से अधिक वादों को पूरा करवाया जा सके।

आमतौर पर रैली में लोगों को जमीन पर ही बैठना पड़ता है, लेकिन जजपा ने अपने समर्थकों व वर्करों के लिए कुर्सियां लगवाई हुई थीं। रैली आयोजकों के अनुसार मैदान में लगवाई गई सभी 25 हजार कुर्सियां भरी हुई थीं। इसके अलावा हजारों की संख्या में लोगों ने खड़े होकर रैली को सुना और देखा। ऐसा भी कहा जा रहा है कि कुर्सियों की इतनी बड़ी कामयाब रैली पहले कम ही देखने को मिली हैं। तीन साल सत्ता में रहने के बाद जजपा के लिए इसे बेस्ट पॉलिटिकल-शो कहा जा रहा है। राजनीतिक रैलियां ढाई बजे के करीब अपने चरम पर होती हैं, लेकिन भिवानी रैली में मुख्य वक्ता ही ढाई बजे के बाद पहुंचे। इतना ही नहीं, लोग भी साढ़े तीन बजे तक रैलियों में पहुंच रहे थे। ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि पुराना शहर होने की वजह से कई सड़कों पर जाम लग गया। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से लोग 152-डी से होते हुए आसानी से तो पहुंच गए, लेकिन एक्सप्रेस-वे से उतरने के बाद उन्हें रैली स्थल तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। जजपा की इस कामयाब रैली से पार्टी वर्करों को बड़ा बूस्ट मिला है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि इस शक्ति प्रदर्शन के बाद जजपा को कमजोर नहीं आंका जा सकता।

विनोद शर्मा के साथ बढ़ सकती पींग

पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा ने भी अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई हुई है। उनके बेटे कार्तिकेय शर्मा जजपा व भाजपा के सहयोग से राज्यसभा पहुंचे थे। रैली में पहुंच कर कार्तिकेय ने नये राजनीतिक समीकरणों को भी हवा दे दी। चौटाला और विनोद शर्मा परिवार के बीच पुराने राजनीतिक व पारिवारिक रिश्ते हैं। कार्तिकेय का दुष्यंत की इस रैली में आना नये विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। दोनों के बीच आने वाले दिनों में हाथ मिलने की गुंजाइश भी इस घटनाक्रम से बनती नज़र आई।

दो विधायकों ने बनाई दूरी

जजपा की इस रैली से पार्टी के दो विधायक दूर रहे। नारनौंद विधायक रामकुमार गौतम और नरवाना विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा की गैर-हाजिरी चर्चाओं में बनी रही। दुष्यंत व नैना चौटाला सहित पार्टी के कुल 10 विधायक हैं।

ताकि वर्कर रहें कनेक्ट

छात्र संगठन में सक्रिय रह चुके और अब पार्टी के प्रधान महासचिव दिग्विजय सिंह चौटाला भी युवाओं की नब्ज को अच्छे से समझते हैं। मंच संचालन करते-करते वे रैली के बीच में ही मुख्य मंच से उतर पर पब्लिक के बीच जा बैठे। उनका लोगों से मेल-मिलाप व संवाद का यह तरीका लोगों को खूब पसंद आया। युवाओं ने दिग्विजय को अपने बीच पाकर उनके समर्थन में जमकर नारे भी लगाए।

2024 के लिये मांगा आशीर्वाद

रैली में अधिकांश वक्ताओं ने जहां दुष्यंत चौटाला को भविष्य के नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया। वहीं जजपा सुप्रीमो और दुष्यंत के पिता डॉ. अजय सिंह चौटाला ने अपने बेटे की पीठ थपथपाते हुए लोगों से 2024 के लिए भी आशीर्वाद मांगा। वे यह कहने में भी नहीं चूके कि दुष्यंत ने खुद को साबित किया है। सभी के सपने आने वाले दिनों में पूरे होंगे। अजय सिंह के भाषण में भी 2024 के चुनाव छाए रहे। एक तरह से उन्होंने भी 2024 में अपने दम पर चुनाव लड़ने का आगाज़ कर दिया।

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