दिल्ली सरकार रैपिड रेल प्रोजेक्ट में खर्च करेगी 415 करोड़ रुपए, अगले साल तक शुरू होगा प्रोजेक्ट
दिल्ली सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए 2019 में 265 करोड़ रुपये और इसके बाद 500 करोड़ रुपये दे चुकी है। अब अदालत में दिल्ली सरकार ने बाकी 415 करोड़ रुपये की रकम भी देने के लिए अपनी हामी भर दी है।
दिल्ली सरकार की सहमति मिलने के बाद अब दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल प्रोजेक्ट को और रफ्तार मिलने की उम्मीद है। 415 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के तहत इस रूट पर दिल्ली सरकार को अपने हिस्से की ये रकम देगी। सरकार की सहमति के बाद अब दिल्ली के हिस्से में बन रहे इस प्रोजेक्ट की राह की अड़चन लगभग खत्म हो गई है। रैपिड रेल बनाने वाली कंपनी का मानना है कि अगले साल तक रैपिड रेल, दिल्ली के सराय काले खां तक आना-जाना शुरू हो जाएगी।

लगभग 30,274 करोड़ रुपये की लागत वाले देश के पहले रैपिड रेल प्रोजेक्ट में दिल्ली सरकार को 1180 करोड़ रुपये की रकम का भुगतान करना है। ये लागत इस आधार पर आंकी गई है कि रैपिड रेल के इस प्रोजेक्ट का कितना हिस्सा दिल्ली में है और कितना यूपी में। दिल्ली में सराय काले खां से शुरू होकर दिल्ली बार्डर तक की रैपिड रेल लाइन की लागत दिल्ली सरकार को ही अदा करनी है। इस
रैपिड रेल प्रोजेक्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए कुछ हिस्सा लोन के रूप में भी लिया गया है। इस लाइन के आसपास के एरिया में कुछ और सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। ऐसे में ये रकम मिलने से रैपिड रेल लाइन के निर्माण के साथ इन सुविधाओं को विकसित करने का काम भी तेजी से हो सकेगा। रैपिड रेल की दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत लाइनों का प्रस्ताव भी अभी विचाराधीन है। इन दोनों ही लाइनों में दिल्ली के साथ हरियाणा और राजस्थान की सरकारों को भी अपना-अपना हिस्सा देना होगा।












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