आने वाला समय उड्डयन क्षेत्र का, यह देश के विकास की रीढ़ होगा-ज्योतिरादित्य सिंधिया
नई दिल्ली, 17 मार्च। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि आने वाला समय उड्डयन क्षेत्र का है। वह दिन दूर नहीं जब नागरिक उड्डयन क्षेत्र देश के विकास की रीढ़ होगा। अभी नागरिक उड्डयन का अर्थ केवल एयरपोर्ट व विमान से ही लिया जाता है, जबकि हकीकत में इसका दायरा इससे काफी अधिक है। हमें इस क्षेत्र में एक इकोसिस्टम बनाने की जरूरत है।

एयरोसिटी में वूमेन इन एविएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने विमानन क्षेत्र में महिलाओं के योगदान की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इन्होंने अपनी उपलब्धियों से अपनी पहचान बनाई। भारत के विमानन इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एयर इंडिया ने तो आजादी से पहले हमारे देश ने विमानन के क्षेत्र में कदम रख दिया था। इसने न सिर्फ भारत के एक हिस्से को दूसरे हिस्से से जोड़ा बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्से से देश को जोड़ने का भी कार्य किया। पहली लाइसेंसधारी महिला पायलट उर्मिला का जिक्र करते हुए कहा कि यह उपलब्धि हमारे देश ने 90 वर्ष पहले ही हासिल कर ली थी। वर्ष 1936 में सरला ठकराल पहली सोलो पायलट बनीं।
दुनिया में सबसे पहले हमलाेगों ने आल वूमेन क्रू विमान उड़ाया। दुनिया में विमानन क्षेत्र की पहली मेंटेनेंस इजीनियर भारतीय महिला थीं। ऐसी अनेक उपलब्धियां हैं जो विमानन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बयां करने के लिए पर्याप्त है। आज भारत में महिला पायलट की हिस्सेदारी दुनिया के औसत से तीन गुना अधिक है। हमारे देश में कुल पायलट में 15 प्रतिशत पायलट महिलाएं हैं।
हमारा लक्ष्य इस प्रतिशत को 15 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है। संबोधन में युवाओं का जिक्र करते हुए उन्हाने कहा कि देश की कुल आबादी में 70 प्रतिशत आबादी ऐसी है जिसकी आयु 35 वर्ष से कम है। यह संख्या अमेरिका की आबादी की तीन गुना है। यूरोप की कुल आबादी की दो गुनी है। इस आबादी में अपार संभावनाएं छिपी हैं। इस संभावना को निखारकर उसका उपयोग करने की जरूरत है। इस आबादी में महिलाओं की अच्छी खासी तादाद है। ऐसे में हम सभी को इस वर्ग को जागृत करने की जरूरत है। समारोह में विमानन क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया।












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