जिस व्यक्ति ने महाजनी व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी, अब उसी पर लगाया जा रहा जमीन हड़पने का आरोप: हेमंत सोरेन
रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि हमारी सरकार लोगों ने लोगों को जमीन वापस दिलाने का काम किया। यह विचित्र लगता है कि उनके ऊपर ही कई आरोप लग रहे हैं। वे सोमवार को एक निजी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में बोल रहे थे।
बगैर किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने इस राज्य को महाजनी व्यवस्था के चंगुल से मुक्त कराया, अब उनके ऊपर भी जमीन हड़पने का आरोप लगाया जा रहा है।

हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार में हजारों एकड़ जमीन रैयतों और ग्रामीणों को वापस कराई गई है। ऐसा पहली बार हुआ, जब हजारीबाग में ग्रामीणों को सैकड़ों एकड़ जमीन वापस की गई।
नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अवधि विस्तार को सरकार ने रद किया। अपनी जमीन को वापस पाने का संघर्ष कर रहे ग्रामीणों की जमीन वापसी कराई गई।
राज्य सरकार ने इसके लिए न्यायाधिकरण का गठन किया। अब लोगों के शिकायत पर उनकी भूमि वापसी का काम किया जा रहा है। आरोप लगाया कि पहले की सरकार में लैंड बैंक बनाकर जमीन का बंदरबांट किया गया।
यह सभी जानते हैं और सरकारी दस्तावेजों में भी दर्ज है। भ्रष्टाचार और घोटाले को लेकर विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि राजनीतिक तौर हतोत्साहित होने से उनका ऐसा व्यवहार देखने को मिल रहा है।
केंद्र सरकार टारगेट कर अपनी सहूलियत की राजनीति करती दिख रही है। जनता सब देख रही है और आगामी चुनावों में फैसला देगी।
कानूनी अड़चनों में फंसाते काम
हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार ने 1932 खतियान पर आधारित स्थानीयता नीति, सरना धर्म कोड, और ओबीसी का आरक्षण बढ़ाने से संबंधित विधेयक विधानसभा से पारित कराया।
इसे नियमत: कानूनी प्रक्रिया के तहत राज्यपाल और केंद्र सरकार को भेजा जाता है। कभी कानूनी अड़चन लगाकर राज्यपाल लौटाते हैं तो कभी यह उनके पास रखा रह जाता है। कभी केंद्र सरकार इसे अपनी आलमारी में रख लेती है।
प्रयास है कि राज्यवासियों की मूल भावना को ताकत मिले। यह सब डबल इंजन की सरकार के लिए आसान था। पिछले 20 वर्षों के दौरान इन विषयों पर कभी पहल नहीं की गई। हम विधायी ताकत से आगे बढ़ेंगे। आवश्यकता पड़ी तो राजनीतिक ताकत लगाकर भी मांग तेज करेंगे।












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