सीएम बघेल ने केंद्र से कहा, खदानें छत्तीसगढ़ में फिर भी नहीं मिल रहा पर्याप्त लौह अयस्क और कोयला
प्रधानमंत्री के सामने राज्य की स्थिति पर ध्यानकर्षण कराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य में स्थित इकाइयों को एनएमडीसी से 25-30 प्रतिशत आयरन ओर ही उपलब्ध कराया जा रहा है।

लौह अयस्क, कोयला, रायल्टी पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दमदारी से केंद्र के सामने यह मुद्दा उठाया। नीति आयोग की बैठक में उन्होंने छत्तीसगढ़ के उद्योगों की परेशानी सामने रखते हुए कहा कि एनएमडीसी और एसईसीएल की खदानें छत्तीसगढ़ में हैं, लेकिन मांग के अनुरूप न तो पर्याप्त आयरन ओर मिल पा रहा है और न ही कोयला। स्थानीय उद्योगों को 25 से 30 प्रतिशत ही लौह अयस्क की आपूर्ति हो पा रही है। इसकी वजह से उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। यदि छत्तीसगढ़ के उद्योगों को पर्याप्त लौह अयस्क, कोयला, रायल्टी दरों में संशोधन आदि मिले तो छत्तीसगढ़ की आर्थिक स्थिति में बेहतर सुधार आएगा। प्रदेश के इस्पात संयंत्रों को उत्पादन क्षमता के अनुरूप लौह अयस्क की उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
तीन वर्ष से कोयले की किल्लत
प्रधानमंत्री के सामने राज्य की स्थिति पर ध्यानकर्षण कराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्थित इकाइयों को एनएमडीसी से 25-30 प्रतिशत आयरन ओर ही उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के एमएसएमई उद्योगों को एसईसीएल से विगत तीन वर्षों से राज्य की आवश्यकता अनुरूप कोयला नहीं मिल रहा है।
बस्तर को हर वर्ष चाहिए तीन मिलियन टन आयरन ओर
राज्य सरकार ने बताया कि आदिवासी अंचल बस्तर में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए विगत चार वर्षों में लगभग नौ हजार करोड़ रुपये पूंजी निवेश के लिए एमओयू किए गए हैं। इनमें से इस्पात उद्योगों के लिए प्रतिवर्ष तीन मिलियन टन आयरन ओर की आवश्यकता होगी।
मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि इन इस्पात संयंत्रों की उत्पादन क्षमता के अनुरूप आयरन ओर आरक्षित रखा जाए तथा प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए। साथ ही विशेष प्रोत्साहन अंतर्गत एनएमडीसी द्वारा आयरन ओर की दर में भी 30 प्रतिशत छूट दी जाए। उन्होंने कहा कि कोयला एवं अन्य प्रमुख खनिजों की रायल्टी दरों में संशोधन नहीं होने से राज्य के वित्तीय हितों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
राज्यों के अधिकारों का सम्मान करें
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2047 का विकसित भारत, टीम इंडिया की भूमिका पर कहा कि देश की एकता और अखंडता अक्षुण्ण बनाए रखने में राज्यों की अहम भूमिका है। केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों का सम्मान करें और उसके हिस्से के संसाधनों को भी हस्तांतरित करने की प्रणाली को और मजबूत बनाएं। एमएसएमई पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में ग्रामीण एवं कुटीर क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा क्षेत्र के संसाधनों को स्थानीय स्तर पर उपयोग किए जाने के उद्देश्य से ग्रामीण एवं कुटीर औद्योगिक नीति 2023-24 की घोषणा की गई है।












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