छत्तीसगढ़: रोजगार गारंटी ने खोली खेती रकबा में वृद्धि की राह , मजदूरी भुगतान की समस्या हुई खत्म
रोजगार गारंटी ने खेती रकबा में वृद्धि की राह खोल दी है। भूमि समतलीकरण के लिए लोग सामने आने लगे हैं। लंबित मजदूरी भुगतान की समस्या भी अब खत्म हो गई हैं।

वित्तीय वर्ष 2022-23 में 10 माह के भीतर भूमि समतलीकरण से जिले में 1,852 हेक्टेयर कृषि रकबा में वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 से समतलीकरण का कार्य चल रहा है, पर यह अब तक का रिकार्ड वृद्धि है। बीते वर्ष इसी माह तक 921 हेक्टेयर में भूमि सुधार हुआ था। पड़त भूमि और वन अधिकार पट्टा से मिले जमीन को रोजगार गारंटी से खेती लायक बनाने में सात हजार 977 परिवारों ने 5.25 करोड़ की कमाई की है। इस वर्ष अब तक 9,941 परिवारों ने 100 दिवस का काम किया है।
रोजगार गारंटी ने खेती रकबा में वृद्धि की राह खोल दी है। भूमि समतलीकरण के लिए लोग सामने आने लगे हैं। लंबित मजदूरी भुगतान की समस्या भी अब खत्म हो गई हैं। सप्ताह से पखवाड़े भर के बीच किसानों के खाते में राशि भुगतान हो रहा रही है। कृषि रकबा में हुई बढ़ोतरी का असर सर्वाधिक धान खेती में हुआ है। पिछले साल खरीफ वर्ष 2021-22 में 44,337 किसानों ने 55 उपार्जन केंद्रों में 18.90 लाख क्विंटल धान बेचा था। वर्ष 2022-23 में हुई खेती रकबा की वृद्धि को देखते हुए 19 लाख क्विंटल लक्ष्य रखा गया था। जनवरी माह के अंत तक हुई खरीदी में इस वर्ष 3.21 लाख क्विंटल धान की अधिक खरीदी हुई है।
बढ़े हुए रकबा में केवल धान ही नहीं बल्कि अन्य फसल में दलहन और तिलहन की उत्पाद ली गई। जिन किसानों के रकबा में वृद्धि वे अब रबी फसल की तैयारी में जुटे हैं। रोजगार गारंटी से भूमि समतलीकरण के अलावा नरवा विकास के कार्य को भी जोड़ा गया है। जिले में चार वर्ष के भीतर रोजगार गांरटी से 645 छोटे बड़े नालो का उपचार कर उन्हे सिंचाई के लिए तैयार कर लिया गया है। नालों के उपचार से 1800 कृषि रकबा को अब तक सिंचित किया जा चुका है। खास बात यह है कि रकबा में हुई बढ़त से जंगल के वनोपज पर निर्भर रहने वाले वनवासी भी अब खेती कार्य में रूचि लेने लगे है। आदिवासी विकास विभाग एवं एकीकृत परियोजना से वनवासियों को कंद और वनौषधि की खेती के लिए सहयोग दिया जा रहा है। कृषि और उद्यानिकी विभाग के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है।












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