केंद्रीय योजनाओं में किसी भी तरह से बदलाव करने वाले राज्यों के फंड पर लग सकती है रोक: सूत्र
केंद्र सरकार उन राज्यों के लिए केंद्रीय निधियों को बंद करने पर विचार कर रही है जो प्रमुख केंद्रीय योजनाओं के स्वीकृत नामकरण और दिशानिर्देशों को बदल देते हैं। सूत्रों के मुताबिक केंद्र के इस कदम से तेलंगाना जैसे गैर बीजेपी शासित राज्यों के लिए यह बड़ा झटका हो सकता है।
केंद्र के इस कदम से गैर-भाजपा शासित राज्यों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं को लागू करने से रोकेगा।रकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में पूंजीगत व्यय पर राज्यों को निर्देश जारी कर उनकी कैपेक्स योजनाओं की मांग की है। राज्यों को प्रधान मंत्री आवास योजना (पीएमएवाई), प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और आयुष्मान भारत - स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र जैसी योजनाओं के अनुमोदित नामकरण का पालन करना अनिवार्य है।

राज्यों को सूचित किया गया कि इस राज्य पूंजीगत व्यय योजना में, एक पूर्व शर्त है कि केवल वे राज्य जो केंद्रीय योजनाओं के मूल नामों और दिशानिर्देशों का पालन करते हैं, वे ही धन प्राप्त करने के पात्र होंगे। केंद्रीय योजनाओं के नामकरण को बदलने का कोई भी प्रयास अयोग्यता का कारण बनेगा।
केंद्र सरकार के इस कदम का उद्देश्य तेलंगाना जैसे राज्यों में विपक्षी दलों को राजनीतिक लाभ से वंचित करना है जहां राज्य सरकार पीएमजीकेएवाई जैसी केंद्रीय योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र के बराबर या उससे अधिक खर्च कर रही है। इस प्रकार, राज्य सरकार को या तो अलग-अलग समानांतर योजनाएं शुरू करनी होंगी या केंद्र को पूर्व के अच्छे काम का श्रेय देना होगा। वित्त विभाग के एक अधिकारी ने कहा।
उदाहरण के लिए, तेलंगाना में कुल 89.96 लाख राशन कार्डों में से केवल 54.44 लाख कार्ड केंद्र की PMGKAY के तहत कवर किए गए हैं। शेष 35.52 लाख कार्ड राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए थे। दोनों योजनाओं में कुल 2.83 करोड़ उपभोक्ता थे।












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