तेलंगाना चुनाव में महिला आरक्षण को भुनाने की BJP करेगी पूरी कोशिश, क्यों किया जा रहा दावा?
तेलंगाना विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी कैंडिडेट्स के नामों का जल्द ऐलान करने वाली है। पार्टी को 119 विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने के लिए पार्टी के टिकटों के लिए लगभग 6,003 आवेदन प्राप्त हुए हैं। ऐसे में किस एजेंडे पर बीजेपी आगे बढ़गी ये एक अहम विषय है। दावा किया जा रहा है कि बीजेपी ने तेलंगाना में उम्मीदवारों की कमी को छिपाने के लिए महिला आरक्षण बिल का फायदा उठाने की योजना बनाई है।
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक तेलंगाना में बीजेपी के पास जिताऊ उम्मीदवार की कमी है। पार्टी कथित तौर पर हाल ही में दावा किया कि महिला आरक्षण के जरिए पार्टी महिला वोटर्स को लुभाने का प्रयास करने की योजना बना रही है। योजना के मुताबिक इससे राज्य में पार्टी की कमजोरी के बारे में सच्चाई छिप जाएगी और साथ ही, उसे महिलाओं से कुछ वोट हासिल करने में मदद मिलेगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस रणनीति के तहत पार्टी महिला उम्मीदवारों को बड़ी संख्या में सीटें देने पर विचार कर रही है।

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक पार्टी के एक नेता ने कहा है कि अगर बड़ी संख्या में महिलाओं और ओबीसी को टिकट दिया गए तो निश्चित रूप से विधानसभा चुनावों में कुछ सीटें जीतने सफलता मिलेगा। इसके लिए निजामाबाद के सांसद धरमपुरी अरविंद और करीमनगर के सांसद बंदी संजय का उदाहरण भी दिया दिया गया।
वहीं बीजेपी को अब तक 119 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के टिकट के लिए करीब 6,003 आवेदन प्राप्त हुए हैं। लेकिन सूत्रों के मुताबिक पार्टी नियमों के मुताबिक इनमें अधिकांश कैंडिडेट गंभीर नहीं है। हालांकि कयास लगाए जा रहे हैं कि करीब 40 सीटों के लिए बीजेपी ने उम्मीदवार पक्के कर लिए हैं। बाकी सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर मंथन जारी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि बीजेपी इस बार महिलाओं, ओबीसी वर्ग को टिकट देने में अधिक दिलचस्पी दिखाएगी। तेलंगाना विधानसभा चुनाव अभियान को लेकर बीजेपी हाईकमान पहले ही अहम निर्देश जारी कर चुकी है। जिसमें कहा गया है कि तेलंगाना में केंद्र की ओर से लाए गए महिला आरक्षण कानून, राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड और केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना को चुनावी अभियान में प्रमुखता से शामिल किया जाए।
भाजपा ये फार्मूला वहां प्रमुखता से अपना रही है, जहां पार्टी के पास जिताऊ उम्मीदवारों की कमी है। वहीं बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि महिलाओं और ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट आवंटित करने से एक बड़ा फायदा ये होगा कि पिछड़े वर्ग के साथ महिलाओं का पूरा सपोर्ट मिलेगा।












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