टीडीपी के सहारे आंध्र में सीटें जीतना चाहती है बीजेपी
इस महीने की शुरुआत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू की बैठक के चलते आंध्र प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने राज्य का दौरा किया है। वहीं अभिनेता से नेता बने और भगवा पार्टी के सहयोगी पवन कल्याण की बहुप्रतीक्षित यात्रा बयाना में शुरू हो गई है। अमित शाह, नड्डा और पवन वाईएसआरसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी की आलोचना करते नजर आ रहे हैं। जिससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि बीजेपी और टीडीपी एक बार फिर साथ आ सकते हैं।
जगन ने भी अफवाहों को हवा देते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए उन्हें कभी भी बीजेपी की जरूरत नहीं थी। भाजपा और पवन कल्याण की जन सेना 2024 में साथ चलती है तो वाईएसआरसी की तुलना में पार्टी की संभावनाएं उज्जवल होंगी। इसी तरह, पवन के प्रशंसक भी आशावादी हैं , क्योंकि 2024 अभिनेता के लिए उतने ही एक अस्तित्व का सवाल है जितना कि गर्व की बात। 2019 के चुनावों में एक भी सीट ना जीत पाने के बाद उन्हें कम से कम विधानसभा में कुछ सीटें जीतने की आवश्यकता है। टीडीपी के समर्थन के चलते वे इसमें सफल हो सकते हैं।

हालांकि सवाल यह है कि इसमें बीजेपी के लिए क्या है? यह एक गैर-बीजेपी इकाई वाला राज्य है। राज्य भाजपा नेताओं का एक वर्ग विधायक के रूप में निर्वाचित होने के लिए टीडीपी के साथ दोहराना चाहता है। उनके लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है क्योंकि पार्टी के वैचारिक अंतर और मतदाता आधार को देखते हुए वाईएसआरसी किसी भी परिस्थिति में भाजपा के साथ औपचारिक गठजोड़ नहीं करेगी।












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