केंद्र सरकार के फैसले से बिहार को मिलेंगे 110 करोड़ रुपये, सांसद निधि पर रोक हटाने से होगा फायदा
पटना। सांसद निधि में केंद्र सरकार की ओर से हाल में दी गई रियायत से बिहार को एक सौ 12 करोड़ रुपये का लाभ होगा। ये रुपये सांसदों की सिफारिश पर विकास के विभिन्न मदों में खर्च होंगे। राज्य से लोकसभा के 40 और राज्यसभा के 16 सदस्य निर्वाचित होते हैं। जदयू के राज्यसभा सदस्य शरद यादव की सदस्यता का मामला न्यायालय में लंबित है। उनके मद में धन का आवंटन नहीं होता है। बचे 55 सदस्यों में हरेक को दो करोड़ रुपये मिलेंगे। इस तरह कुल 110 करोड़ रुपये मिलेंगे। राज्य के विकास में 110 करोड़ रुपये की भागीदारी केंद्रीय कैबिनेट के ताजा फैसले से होगी।

केंद्रीय कैबिनेट ने 10 नवंबर की बैठक में सांसदों को स्थानीय क्षेत्र विकास मद में दो-दो करोड़ रुपये देने का फैसला किया। यह राशि वित्तीय वर्ष 2021-22 के मद में दी जाएगी। इससे पहले सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित सांसद निधि की पूरी रकम को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में खर्च करने का फैसला किया था। साल में हरेक सांसद को इस मद में पांच करोड़ रुपये दिए जाते हैं। इनमें से तीन करोड़ रुपये कोरोना फंड में खर्च हो चुके हैं। अर्थव्यवस्था में हो रहे सुधार को देखते हुए केंद्र सरकार ने बाकी दो करोड़ रुपये सांसदों को आवंटित करने का फैसला किया है। अर्थव्यवस्था की मौजूदा रफ्तार कायम रही तो अगले वित्तीय वर्ष (2022-23) में सांसद निधि की पूरी राशि जारी हो सकती है।
दो वित्तीय वर्ष से बाधित थी योजना
राज्य के लिए राहत की बात यह है कि दो वित्तीय वर्ष से सांसद निधि की योजना बाधित थी। 2019 में लोकसभा का चुनाव हुआ। वित्तीय वर्ष 2019-20 में पूरी निधि के तौर पर राज्य को दो सौ 80 करोड़ रुपये मिले। वित्तीय वर्ष 2020-21 कोई राशि नहीं मिली। दो वित्तीय वर्षों में राज्य को पांच सौ 60 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जदयू के सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी ने कहा कि केंद्र सरकार का फैसला राज्य के हित में है। कोरोना के कारण विकास का बहुत काम बाधित हुआ। उम्मीद है कि राशि मिलने से थोड़ी राहत मिलेगी।












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