ओडिशा में‘स्पेशल मिशन’ के तहत सुंदरगढ़ में बाजरा की खेती को दिया जा रहा बढ़ावा
बाजरा की खेती और इसके अपभोग को बढ़ावा देने के लिए साल 2023 को अंतराष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित किया गया है.ओडिशा जैसे राज्य में बाजरा आदिवासी बहुल छात्रों में कुपोषण को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभ
भुवनेश्वर,5 सितंबर: बाजरा की खेती और इसके अपभोग को बढ़ावा देने के लिए साल 2023 को अंतराष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित किया गया है.ओडिशा जैसे राज्य में बाजरा आदिवासी बहुल छात्रों में कुपोषण को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. यह पोषण सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है. औडिशा के सुंदरगढ़ जिले में आईसीडीएस के तहत छोटे बच्चों को पूरक पोषण कार्यक्रम के अंतर्गत रागी के लड्डू दिए जा रहे हैं. नीति आयोग ने इस ओडिशा में इस मिशन की सराहना की है.

नीति आयोग का मानना है कि आईसीडीएस की इस पहल से रागी और अन्य बाजरा के किस्मों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. ओडिसाबाइट्स बेवसाइट के मुताबिक नीति आयोग ने इस पहल को तीन आयामी लाभ देने वाला बताते हुए कहा कि इससे किसानों और महिला समूहों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. इतना ही नहीं इसके जरिए टेक होम राश के उत्पादों में भी विविधता आएगी.
किसानों और एसएचजी की महिलाओं की बढ़ी आय
सुंदरगढ़ के कलेक्टर डॉ हर्षद हवली ने नीति आयोग की रिपोर्ट परअपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बाजरा के माध्यम से पोषण की कमी को दूर करकेहम बच्तों के मबूत विकास की नींव का निर्माण कर रहे हैं. इस नए प्रयोग के कारण जिले में किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की आय बढ़ाने में भी मदद की ह.
आईसीडीएस में बाजरा
प्री-स्कूल बच्चों के पोषण के पूरक के लिए रागी लड्डू को 15 अगस्त, 2020 को सुंदरगढ़ जिले में एक पायलट कार्यक्रम के रूप में लॉन्च किया गया था. एक साल के भीतर, 17 ब्लॉक और 4 यूएलबीएस में सभी 21 आईसीडीएस परियोजना स्थानों को कवर करने वाली एक सार्वभौमिक योजना बन गई. इस पहल से 3-6 वर्ष के आयु वर्ग के 63,000 से अधिक बच्चों को लाभ मिल रहा है, जबकि 39 एसएचजी रागी लड्डू मिश्रण तैयार करने की परियोजना में शामिल हैं.
बाजरा की खेती के लिए पंचवर्षीय प्लान तैयार
जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के समर्थन से, प्रशासन ने ओडिशा बाजरा मिशन कार्यक्रम के तहत बाजरा की खेती के तहत 3,000 हेक्टेयर (हेक्टेयर) कृषि भूमि को लाने के लिए एक पंचवर्षीय योजना तैयार की है. पंचवर्षीय योजना (वित्त वर्ष 2022-23) के अंत में बाजरा कवरेज के तहत क्षेत्र 6000 हेक्टेयर को पार करने के लिए तैयार है.












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