आंध्र प्रदेश: सीएम रेड्डी ने की 'स्वच्छ कार्यक्रम' की शुरुआत, महिलाओं को मुफ्त दिए जाएंगे सैनिटरी नैपकिन
बेहतर स्वास्थ्य के लिए एक नई पहल करते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 'स्वच्छ कार्यक्रम' शुरू किया है।
हैदराबाद, 5 अक्टूबर। बेहतर स्वास्थ्य के लिए एक नई पहल करते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 'स्वच्छ कार्यक्रम' शुरू किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाली किशोरियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए गुणवत्तापूर्ण सैनिटरी नैपकिन मुफ्त में उपलब्ध कराना है।

इस कार्यक्रम के तहत राज्य सरकार 32 करोड़ रुपये की लागत से 7-12 कक्षाओं में पढ़ने वाले 10 लाख से अधिक छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण सैनिटरी नैपकिन प्रदान करेगी। जहां प्रत्येक छात्रा को हर साल 120 नैपकिन दिए जाएंगे। छात्राओं को सैनिटरी पैड के उचित निपटान के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। जहां क्लैप कार्यक्रम के तहत अलग कूड़ेदान और 6417 इंसिनिरेटर्स प्रदान किए गए हैं।
कार्यक्रम के लॉन्च के दौरान मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि "कई रिपोर्टों में कहा गया है कि इस देश में लगभग 23 प्रतिशत युवा लड़कियां मासिक धर्म के दौरान स्कूलों और कॉलेजों में जाने से दूर रहती हैं। इन परिस्थितियों को बदलने के लिए, राज्य सरकार स्वच्छ कार्यक्रम लाने के लिए नाडु-नेडु पहल के तहत सभी सरकारी संस्थानों में शौचालयों में सुधार करने से लेकर कदम उठा रही है।"
उन्होंने आगे कहा कि 'इस पहल के तहत, महिला शिक्षकों, एएनएमएस और महिला पुलिस द्वारा हर महीने एक बार कक्षा 7-12 में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए मासिक धर्म के बारे में जागरूकता पैदा की जाएगी। इसके अलावा दिशा एप व दिशा एक्ट के माध्यम से भी महिला पुलिस जागरूक करेंगी और संयुक्त कलेक्टर आसरा ओरिएंटेशन प्रोग्राम की निगरानी करेंगे। एक महिला शिक्षिका को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।'
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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य महिला सशक्तिकरण में अग्रणी है, जहां ये सैनिटरी नैपकिन चेयुथा की दुकानों पर सस्ती दरों पर बेचे जाएंगे। सरकार ने नाडु-नेडु की पहल की और 56703 स्कूलों और छात्रावासों में बहते पानी की सुविधाओं के साथ सभी शौचालयों का निर्माण किया। पहले चरण में 15,715 स्कूलों का जीर्णोद्धार किया गया है और बाकी सभी स्कूलों को 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा। सीएम ने कहा- 'मासिक धर्म के बारे में बात करने में संकोच नहीं करना चाहिए। हमें छात्राओं के बीच अधिक जागरूकता पैदा करने और उन्हें सुरक्षित प्रथाओं पर शिक्षित करने की आवश्यकता है।'












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