स्वामीनाथन के निधन पर आंध्र प्रदेश सीएम जगन ने जताया दुख, बोले- उनकी दूरदृष्टि ने ग्रामीण परिदृश्य को बदल दिया
भारत में 'हरित क्रांति' के जनक एमएस स्वामीनाथन का गुरुवार 28 सितंबर को 98 साल की उम्र में चेन्नई में निधन हो गया। स्वामीनाथन लंबे समय से बीमार चल रहे थे। पौधों के जेनेटिक साइंटिस्ट स्वामीनाथन ने 60 के दशक में जब अकाल पड़ा था तब अन्य वैज्ञानिकों के साथ मिलकर वैज्ञानिकों के साथ मिलकर गेहूं की उच्च पैदावार वाली किस्म (HYV) के बीज भी डेवलप किए थे। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री ने स्वामीनाथन के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि की, इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सराहना की है।

मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने कृषि क्षेत्र में स्वामीनाथन के योगदान की सराहना करते हुए कहा उनकी दूरदृष्टि ने ग्रामीण परिदृश्य को बदल दिया है। सीएम ने भारत की हरित क्रांति के जनम डॉ एमएस स्वामीनाथन गारू के निधन के बारे में सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ है। उन्होंने राष्ट्र का पेट भरने के लिए उनके समर्पण और प्रतिबद्धता ने भारत में कृषि क्षेत्र को अमूल्य परिवर्तन किया।
उन्होंने कहा वर्तमान समय में देश में बढ़ती अनाज की खपत को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर देने की आवश्यकता है। ऐसे में डॉक्टर स्वामीनाथन का काम और विरासत हम सभी का मार्गदर्शन करती रहेगी और प्रेरणा देती रहेगी।
वहीं आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस अब्दुल नजीर ने अपने शोक संदेश में पद्म विभूषण डॉ स्वामीनाथन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा "स्वामीनाथन एक विश्व-प्रसिद्ध कृषि विज्ञानी, कृषि वैज्ञानिक, पादप आनुवंशिकीविद्, प्रशासक और मानवतावादी हैं, जिन्हें भारत में गेहूं और चावल की उच्च उपज देने वाली किस्मों को पेश करने में उनकी भूमिका के लिए हरित क्रांति के वैश्विक नेता के रूप में जाना जाता है।












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