शराब चोरी मामले में की दोषियों के खिलाफ कार्यवाही: उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला

उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कोरोना महामारी के दौरान व लॉकडाउन के समय प्रदेश में गोदाम से शराब चोरी की जांच से सम्बन्धित लाए गये ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का विस्तार से जवाब दिया।

Action against the culprits in liquor theft case: Deputy Chief Minister Dushyant Chautala

हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने आज विधानसभा में कोरोना महामारी के दौरान व लॉकडाउन के समय प्रदेश में गोदाम से शराब चोरी की जांच से सम्बन्धित लाए गये ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने बताया कि इस मामले में अभी तक की जांच के दौरान पाए गये दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की गई है।

उपमुख्यमंत्री ने सदन को अवगत करवाया कि खरखौदा-मटिंडू रोड, सोनीपत, में अस्थायी गोदाम में बरामद शराब के स्टॉक से चोरी के मामले की जांच करने के लिए विद्युत, अधिकारिता, नवीकरणीय ऊर्जा एवं आवास विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री टी.सी. गुप्ता की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एस.ई.टी.) का गठन किया गया, जिसने 30 जुलाई 2020 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में जो अधिकारी व कर्मचारी दोषी पाए गए उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, इस पूरे मामले की जांच राज्य सतर्कता ब्यूरो दी गई।

उन्होंने बताया कि तत्कालीन हरियाणा पुलिस महानिदेशक द्वारा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) कला रामचन्द्रन की अध्यक्षता में एक कमेटी का भी गठन किया गया। इसमें पुलिस विभाग की अनियमितता, विफलता के बारे जांच की। इस रिपोर्ट के आधार पर 14 मामलों में 27 पुलिस कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की गई।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जांच के आधार पर आबकारी एवं कराधान विभाग द्वारा भी कार्यवाही की गई, जिसमें सात ए.ई.टी.ओ. तथा 1 ए.ई.टी.ओ. के खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि 27 मार्च, 2020 से 31 मार्च 2020 की अवधि के दौरान परमिट स्वीकृत करने के एक मामले में 1 ए.ई.टी.ओ, जिसे नियम 7 के तहत चार्जशीट किया गया और शेष 7 मामलों में विभागीय कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

उन्होंने बताया कि उपरोक्त अवधि के दौरान परमिट और पास जारी करने के लिए 15 आबकारी निरीक्षकों को हरियाणा सिविल सेवा (दण्ड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम 7 के तहत चार्जशीट किया गया है। उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अवैध शराब की बिक्री से होने वाले राजस्व के नुकसान को रोकने व विभाग की प्रणाली में सुधार के लिए अनेक कदम उठाए। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में सभी डिस्टिलरी एवं बाटलिंग संयंत्रों में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरा प्रणाली स्थापित की गई है, साथ ही मुख्यालय में एक एकीकृत नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है इन कैमरों से लाईव कीड मुख्यालय के साथ-साथ जिला स्तर के अधिकारियों को भी उपलब्ध करवाई जा रही है।

उन्होंने बताया कि डिस्टिलरी और बाटलिंग प्लांट में मास फ्लो मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में नियमों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। मास फ्लो मीटर की कार्यप्रणाली को और अधिक सुव्यवस्थित करने के लिए विभाग द्वारा मानक/विनिर्देश निर्धारित किए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं कि शराब के परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहन जीपीएस सक्षम हो और इन वाहनों को ई-लाक से भी बंद किया गया हो। यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि शराब ले जाने वाले ऐसे वाहनी के सभी आउटलेट्स पर टेम्पर प्रूफ सील लगाई जाए। विभाग द्वारा शराब के संचालन की निगरानी के लिए ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम शुरू करने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।

शराब की अवैध बिक्री न हो इसके लिए विभाग द्वारा नियमित रूप से शराब की दुकानों की चेकिंग की जा रही है। राजस्व की सुरक्षा के लिए वर्ष 2022-23 की आबकारी नीति में भारी मात्रा में अवैध शराब की बिक्री करने वाले ऐसे थोक लाइसेंस धारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक प्रावधान किये गये हैं। विभाग सक्रिय रूप से ऐसे मामलों पर नजर रख रहा है और दोषियों से भारी जुर्माना वसूली कर रहा है। ऐसे मामलों में 2020-21 से अब तक 340 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है।

उन्होंने आगे बताया कि शराब की अवैध बिक्री पर और अंकुश लगाने के लिए जिला अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश किए गए हैं कि जिले के सभी थोक लाइसेंस वाले परिसरों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हो और टीईटीसी (आबकारी) को लाइन फीड उपलब्ध हो। शराब की अवैध बिक्री को रोकने के लिए लाइसेंसधारियों द्वारा बिल जारी करने के लिए अधिकतर शराब की दुकानों में प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें स्थापित की जा चुकी है। अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए शेष लाइसेंसधारियों के खिलाफ आबकारी नीति के प्रावधानों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।

अवैध और नकली शराब पर अंकुश लगाने के लिए हरियाणा आबकारी अधिनियम, 1914 के प्रावधानों में संशोधन किया गया है। धारा 61 के प्रावधानों को और सख्त किया गया है। इसके अलावा, धारा 72ए को मार्च, 2020 में संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया है जिसके अनुसार जहरीली दवा या कोई अन्य सामग्री मिली शराब से अगर किसी की मृत्यु हो तो ऐसे मामलों में मृत्यु की सजा या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सतर्कता ब्यूरो (अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) द्वारा अब तक 214 शराब ठेकेदारों, आबकारी और कराधान विभाग के 111 अधिकारियों/कर्मचारियों, पुलिस विभाग के 869 राजपत्रित/ अराजपत्रित अधिकारियों/कर्मचारियों तथा डिस्टिलरी, बुअरीज और बॉटलिंग प्लांट से सम्बन्धित 46 व्यक्तियों के ब्यान दर्ज किये जा चुके है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अपनी जांच जारी रखे हुए है। तदानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव की एक सदस्यीय समिति का गठन 18 मई, 2022 को किया गया है, जो सुझावों के साथ-साथ किए जाने वाले सुधारात्मक उपायों की पहचान करेगी।

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