पंजाब में 'आप' के विधायक गुरप्रीत सिंह गोगी ने चला दांव, शिअद और कांग्रेस हुईं बोल्ड

लुधियाना। पूर्व जिला कांग्रेस प्रधान एवं वर्तमान में आम आदमी पार्टी के विधायक गुरप्रीत सिंह गोगी ने सियासी पिच पर ऐसी गुगली फेंकी की कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल दोनों बोल्ड हो गए। पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु को उनके गढ़ में मात देने के बाद गोगी ने उनके खेमे के मजबूत पार्षदों को अपनी टीम में शामिल करना शुरू कर दिया है। इस तैयारी का मकसद बिलकुल साफ है।

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दरअसल, अगले साल होने वाले नगर निगम चुनाव के लिए मजबूत टीम तैयार की जा रही है। खासबात यह है कि विधायक गोगी लुधियाना में किसी कार्यक्रम में कांग्रेस और शिअद के पार्षदों को अपने पक्ष में करने की जगह उन्हें चंडीगढ़ ले गए। वहां आप के बड़े नेताओं से उनकी मुलाकात करवाई ताकि उन्हें यह आभास हो जाए कि वे सिर्फ उन तक सीमित नहीं हैं।

विधायक गुरप्रीत गोगी ने कांग्रेस की वरिष्ठ पार्षद अमृत वर्षा रामपाल, दविंदर सिंह घुम्मन, नरेश धींगान और कपिल सोनू के अलावा शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व पार्षद तनवीर सिंह धालीवाल को अपने साथ मिला लिया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन नेताओं के विस चुनाव से पहले से गोगी के साथ अच्छे संबंध हैं। विस चुनाव में जिस तरह आप की आंधी चली, उस कारण भी कई पार्षदों ने अपना राजनीतिक भविष्य संवारने के लिए आप का दामन थामना बेहतर समझा है।

निगम चुनाव में बदल सकती है स्थिति
पार्षद अमृत वर्षा रामपाल तीन बार शहर के पाश इलाके सराभा नगर से पार्षद हैं। इस बार वह निगम चुनाव से पहले आप में शामिल हो गई हैं। अमृत वर्षा रामपाल के पिछले कुछ साल में पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु से अच्छे रिश्ते नहीं रहे हैं।

वहीं दविंदर सिंह घुम्मन उर्फ काला की पत्नी मनिंदर कौर घुम्मन पार्षद हैं। मनिंदर भाजपा की पूर्व महिला जिला अध्यक्ष भी रहीं हैं। वे विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो गई थीं। दविंदर घुम्मन कांग्रेस में खुद को असहज महसूस कर रहे थे।

कपिल सोनू पहली बार आजाद उम्मीदवार के रूप में पार्षद बने थे और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। पिछले नगर निगम चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दी थी, जिससे वह नाराज चल रहे थे।
तनवीर सिंह धालीवाल शिरोमणि अकाली दल के पूर्व जिला यूथ विंग के प्रधान रहने के साथ पूर्व पार्षद रहे हैं। वे काफी जुझारू नेता रहे हैं। उन्होंने भी पिछला निगम चुनाव हार जाने और शिअद के घटते जनाधार को देखकर आप के साथ जाना ही बेहतर समझा।

नरेश धींगान वाल्मीकि समाज में रसूख रखने वाले नेता हैं। ऐसा ही कुछ हालात सतविंदर सिंह जवदी के भी हैं। वे भी खुद को वर्तमान राजनीतिक दायरे से बाहर मान रहे थे। अब वे आम आदमी पार्टी के सहारे टीम में अपनी वापसी देख रहे हैं।

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