हरियाणा में आयुष प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए एक नई नीति लागू

इस नीति के उदेश्य के संबंध में उन्होंने बताया कि इस नीति का उदेश्य समग्र कल्याण मॉडल के आधार पर सेवाएं प्रदान करने के लिए निजी क्षेत्र में आयुष औषधालयों/क्लीनिकों, पंचकर्म केंद्रों, आयुष अस्पतालों के नेटवर्क की पहचान।

A new policy has been implemented to promote AYUSH system in Haryana

हरियाणा सरकार ने आयुष प्रणाली व सुविधाओं को बढावा देने के लिए आज एक नई नीति ''पाॅलिसी फोर सर्टिफिकेशन एण्ड स्टेण्र्टडाईजेशन आफ आयुष फैसीलिटिज'' (आयुष सुविधाओं के प्रमाणन और मानकीकरण के लिए नीति) लागू की है। इस संबंध में जानकारी देते हुए हरियाणा के गृह, स्वास्थ्य और आयुष मंत्री अनिल विज ने देते हुए बताया कि यह नीति आगामी 31 अक्तूबर, 2027 तक लागू रहेगी और इस नीति की एक अधिसूचना आज जारी कर दी गई है।

इस नीति के उदेश्य के संबंध में उन्होंने बताया कि इस नीति का उदेश्य समग्र कल्याण मॉडल के आधार पर सेवाएं प्रदान करने के लिए निजी क्षेत्र में आयुष औषधालयों/क्लीनिकों, पंचकर्म केंद्रों, आयुष अस्पतालों के नेटवर्क की पहचान और संचालन के माध्यम से आयुष के मुख्य योग्यता क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके लागत प्रभावी आयुष चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के कवरेज को बढ़ाना है ताकि बीमारी के बोझ को कम करने और जेब खर्च को कम करने के लिए जनता को 'स्वयं की देखभाल' के लिए सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि आयुष चिकित्सा पद्धति के तहत लक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से संचारी/गैर-संचारी रोगों में कमी लाने की भी परिकल्पना की गई है।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य देखभाल की आयुष प्रणालियों के इष्टतम विकास और प्रसार द्वारा समाज के समग्र कल्याण को बढ़ावा देना इस नीति का विजन है जिससे सेवाओं के लिए लागत प्रभावी और समान पहुंच प्रदान की जा सके। श्री विज ने बताया कि हरियाणा राज्य में आयुष प्रणाली को एकीकृत करके और इसे पूरे राज्य में स्वास्थ्य देखभाल और कल्याण प्रणालियों के आवश्यक घटक के रूप में मुख्यधारा में लाकर मजबूत करना भी नीति का उदेश्य है।

आयुष मंत्री ने बताया कि इसके अलावा, आयुष के लिए हरियाणा को प्रतिस्पर्धी और पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करना, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में उपचार के पसंदीदा विकल्पों में से एक के रूप में चिकित्सा की आयुष प्रणाली स्थापित करना, पंचकर्म, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी आयुष के तहत सेवाओं के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे को उन्नत करना और अस्पतालों, वेलनेस सेंटरों और रिसॉर्ट्स, हर्बल पार्कों, होमस्टे और स्टैंड-अलोन केंद्रों सहित नए बुनियादी ढांचे का विकास करना, आयुष से संबंधित क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने और पूरे राज्य में लागत प्रभावी आयुष सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस नीति कार्रवाई के माध्यम से समाज के स्वास्थ्य और कल्याण के परिणाम में सुधार करना और राज्य भर में स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के माध्यम से निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, पुनर्वास और उपशामक देखभाल में फैली सेवाओं की व्यापक रेंज प्रदान करके आयुष्मान भारत के प्रयासों को पूरा करना शामिल है।

विज ने बताया कि नई और चालू दोनों परियोजनाओं में निवेश को आकर्षित करने के लिए राज्य द्वारा सेवाओं के बीच हेल्थकेयर को फोकस क्षेत्रों में से एक के रूप में पहचाना गया है। सरकार अन्य सेवा क्षेत्रों के बीच आयुष को प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्र के रूप में बढ़ावा देने का प्रयास करेगी। जिसके तहत आयुष वेलबीइंग डेस्टिनेशन में आयुष अस्पतालों, कॉलेजों, वेलनेस सेंटरों से लेकर निवारक, उपचारात्मक और पुनर्वास उपचार/सुविधाएं, गेस्ट हाउस और होम-स्टे, ऑर्गेनिक रिटेल सुविधाएं, योग और प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, स्पा और अरोमाथेरेपी केंद्र, बॉडी रैप्स, मसाज वेलनेस

सेंटर, सौंदर्य उपचार, विशेष त्वचा देखभाल क्लिनिक, सांस्कृतिक और विरासत प्रदर्शन के लिए बाहरी सत्र इत्यादि हैं। इसी प्रकार, स्टैंडअलोन या मल्टी-स्पेशियलिटी आयुष अस्पताल जिसमें आयुष के तहत चिकित्सा की सभी या 5 प्रणालियों में से कुछ शामिल हैं और नैदानिक प्रतिष्ठान अधिनियम 2011, एनएबीएच या आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का अनुपालन करते हैं, जो भी लागू हो। इसी तरह, आयुष वेलनेस सेंटर में जैसे आयुष क्लीनिक/डे केयर सेंटर/डिस्पेंसरी/पंचकर्मा क्लिनिक/योग, नेचुरोपैथी और मेडिटेशन सेंटर/कन्वलेसेंस सेंटर आदि बिना आईपीडी सुविधा के हैं।

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