झारखंड: राज्य के 625 प्लस टू स्कूलों में 16 विषयों के पीजी टीचर के 5500 नए पद होंगे सृजित
प्लस टू हाईस्कूलों में जिन विषयों में अभी तक पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेंड (पीजीटी) टीचर के एक भी पद नहीं हैं, उन विषयों में पद सृजन की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। कुल 16 विषयों में 5500 पीजीटी शिक्षकों के पद सृजित किए जाएंगे।
नई दिल्ली,30 नवंबर:प्लस टू हाईस्कूलों में जिन विषयों में अभी तक पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेंड (पीजीटी) टीचर के एक भी पद नहीं हैं, उन विषयों में पद सृजन की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। कुल 16 विषयों में 5500 पीजीटी शिक्षकों के पद सृजित किए जाएंगे। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में 50 स्टूडेंट्स पर एक शिक्षक होंगे। वहीं, अन्य विषयों में 80 छात्रों पर शिक्षक के एक पद सृजित किए जाएंगे।

बताते चलें कि राज्य गठन के 22 साल बाद इन विषयों में पद सृजन की कार्यवाही शुरू हुई है। शिक्षक और छात्र संगठनों ने कई बार शिक्षकों के पद सृजन कराने के लिए सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया था। इनका कहना था कि प्लस टू हाईस्कूलों में कई विषयों के शिक्षक नहीं रहने से छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
अप्रासंगिक विषयों के शिक्षक के पदों को खत्म करेगी सरकार
बैठक में स्कूली शिक्षा विभाग ने प्लस टू स्कूलों में नए विषयों में शिक्षकों के पद सृजन और अप्रासंगिक विषयों के शिक्षकों के पदों को सरेंडर करने का प्रस्ताव सभी जिलों से 20 सितंबर तक मांगा था। प्रस्ताव आने के बाद पद सृजन की कार्यवाही शुरू हुई है। कैबिनेट की अगली बैठक में पीजीटी शिक्षकों के पद सृजन से संबंधित प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
इन विषयों में होना है पद सृजित
प्लस टू स्कूलों में पीजीटी शिक्षकों के जिन विषयों में पद सृजित किए जा रहे हैं, उनमें राजनीति विज्ञान, मानवशास्त्र, कंप्यूटर साइंस, सोसियोलॉजी, होमसाइंस, उर्दू, संथाली, बांग्ला, आईटी, मुंडारी, हो, खड़िया, कुडुख, कुरमाली, खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया और उड़िया शामिल है। राज्य के 510 प्लस टू हाईस्कूलों में सिर्फ 11 विषयों में पीजीटी शिक्षक हैं। इसमें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, अर्थशास्त्र, भूगोल, इतिहास, भौतिकी, रसायनशास्त्र, जीव विज्ञान, गणित और वाणिज्य शामिल है। वहीं अन्य विषयों में एक भी शिक्षक नहीं है।
नामांकन नहीं, क्योंकि शिक्षक नहीं
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं और उर्दू में प्लस टू स्कूलों में यह कहते हुए नामांकन ही नहीं लिया गया कि इन विषयों के शिक्षक नहीं है। जबकि इन विषयों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या अच्छी खासी है। झारखंड छात्र संघ ने इस ओर पत्र लिखकर शिक्षा विभाग ध्यान आकृष्ट कराया था।
विधानसभा में भी उठे थे पद सृजन के प्रस्ताव
जनजातीय भाषाओं में शिक्षकों के पद नहीं होने को लेकर विधानसभा में सवाल उठे थे। जवाब में राज्य सरकार ने कहा था कि कि शिक्षकों के पद सृजन के लिए विद्यालयवार माध्यमिक स्तर की कक्षाओं में नामांकित एवं अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की संख्या का आकलन कर पद सृजन किया जाएगा। विभागीय स्तर पर अभी से इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।












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