ओडिशा की माली पहाड़ियों में 45 गांवों के मरीजों के के लिए उग रहे 100 दुर्लभ औषधीय पौधे
ओडिशा में छोटे-मोटे संक्रमण से लेकर दिल की बीमारियों, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर, हाई ब्लड प्रेशर और पैरालिसिस जैसी बीमारियों के लिए इन पहाड़ियों से जड़ीबूटी को परंपरागत रूप से अचूक इलाज के तौर पर देखा जाता है।

ओडिसा में माल्यवंत या माली पहाड़ी श्रृंखला इसमें बसे 45 सुरम्य गांवों के लोगों के लिए सब कुछ है। कोरापुट जिले के सेमिलीगुडा शहर से सिर्फ पांच किमी दूर स्थित गांवों में ओडिशा के वन विभाग से संबंधित ये पहाड़ियां हर्बल दवाओं की बहुत बड़ी प्रदाता हैं।
त्वचा के छोटे-मोटे संक्रमण से लेकर दिल की बीमारियों, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर, हाई ब्लड प्रेशर और पैरालिसिस जैसी बीमारियों के लिए इन पहाड़ियों से जड़ीबूटी को परंपरागत रूप से अचूक इलाज के तौर पर देखा जाता है। इस विचार को आगे बढ़ाते हुए 10 दिशरियों (पारंपरिक चिकित्सकों) ने संयुक्त रूप से वर्ष 2000 में श्री गुप्तेश्वर हर्बल मेडिसिन एंड ट्रेडिशनल टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट की शुरुआत की।
श्री गुप्तेश्वर संस्थान के निदेशक हरि पांगी ने ज्यादा जानकारी देते हुए बताया, 'हम योग्य डॉक्टर नहीं हैं। मेरे बड़े भाई और मां भी दिशारी का काम करते हैं। मेरे दादाजी के पिता जयपुर साम्राज्य के महाराजा विक्रम देव के दरबार में एक दिशारी थे। हम यहां तक उस ज्ञान का अभ्यास करके आए हैं जो हमारे पूर्वजों ने हमें दिया था... यह सुविधा सुनिश्चित करेगी कि हमारे पास जो पारंपरिक ज्ञान है वह हमारे जाने के बाद फीका नहीं पड़ेगा।'
आपको बता दें कि दिशारी ईश्वरमाली, देवमाली और हातिमाली से जड़ी-बूटियाँ एकत्र करते हैं जो माली पहाड़ी श्रृंखला का हिस्सा हैं। वे पेड़ की शाखाओं, पत्तियों, जड़ों और फूलों को मूल्यवान औषधियों में बदल देते हैं। कुछ को एक विशिष्ट तापमान पर सुखाया जाता है और दूर रखा जाता है।












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