हरियाणा में जबरन धर्म परिवर्तन पर होगी 10 साल की सजा
चंडीगढ़, 5 मार्च। हरियाणा में जबरन धर्म परिवर्तन करना अब अपराध होगा। ऐसा करने या करवाने वालों को 10 साल तक सजा हो सकेगी। साथ ही, उन पर 4 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगेगा। गृह मंत्री अनिल विज ने शुक्रवार को विधानसभा में शून्यकाल के बाद यह विधेयक सदन में टेबल किया। फौरी तौर पर इस पर चर्चा हुई। विपक्ष ने खूब हंगामा किया। सरकार इस विधेयक पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। बजट सत्र के दौरान ही इसे पास किया जाएगा।

कांग्रेस विधेयक का यह कहकर विरोध कर रही है कि प्रदेश में अब तक जबरन धर्म परिवर्तन का कोई केस नहीं आया है तो ऐसे कानून का कोई औचित्य नहीं है। वहीं, सीएम मनोहर लाल खट्टर के पास ऐसे कई मामलों का रिकार्ड है, जो हरियाणा में हुए हैं। जब यह बिल पास होगा तो वे उन मामलों को जिक्र सदन में करेंगे। सदन में प्रस्तुत 9 पन्नों के विधेयक में किसी धर्म विशेष का जिक्र नहीं है। विधेयक के उद्देश्य और कारण बताते हुए दावा किया गया है कि प्रदेश में ऐसे मामले आने के बाद भी इस कानून को बनाना जरूरी समझा गया।
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विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बल प्रयोग, धमकी, अनुचित प्रभाव, मारपीट या डिजिटल ढंग से धर्म परिवर्तन करवाता है या विवाह के लिए धर्म परिवर्तन करवाता है तो उसके खिलाफ कानून काम करेगा। ऐसा अपराध करने पर कम से कम एक और अधिकमत 5 साल की सजा होगी। एक लाख का जुर्माना होगा। अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म में अपने मूल धर्म को छुपाकर शादी करता है तो इसे कानून के विरुद्ध माना जाएगा। ऐसे में 3 से 10 साल तक की सजा होगी और 3 लाख रुपये जुर्माना। यह व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन पर लागू होगा। सामूहिक धर्म परिवर्तन में 5 से 10 साल तक की सजा और 4 लाख जुर्माना होगा।
इच्छा से धर्म परिवर्तन पर रोक नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधेयक किसी व्यक्ति को इच्छापूर्वक धर्म परिवर्तन पर रोक नहीं लगाता। बशर्ते इसके लिए उसे जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन करना होगा। मजिस्ट्रेट जांच करके तय करेगा कि धर्म परिवर्तन का मामला कानून का उल्लंघन है या नहीं।












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