Religion: जानिए पैर में क्यों नहीं पहना जाता है सोना और क्या है मांग-टीका का महत्व?
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नई दिल्ली। भारत परंपराओं और संस्कारों का देश है, यहां की परंपराओं पर अगर गौर फरमाएंगे तो आप पाएंगे कि हर चीज के पीछे कुछ मौलिक कारण हैं, जो इंसान की सेहत और सुख से जुड़े हुए हैं। तो इस श्रेणी में महिलाओं का श्रृंगार भी आता है, जिसमें गूढ़ रहस्य छिपा हुआ है। हर महिला को आभूषणों का शौक होता है , उनका बस चले तो वो सिर से पांव तक सोने से लद जाएं लेकिन ऐसा कर पाना हर किसी के लिए संभव नहीं है। शरीर के हर अंग के लिए सोने के गहने बनते हैं लेकिन पैरों के लिए कभी सोने की कोई चीज बनाई नहीं जाती है। आखिर क्या है इसके पीछे का कारण, चलिए जानते हैं, दरअसल स्वर्णाभूषण शरीर के ऊपरी भाग में घारण किये जाते हैं और वेदांग की मान्यता है कि सोना संसार के पालक श्री हरि विष्णु को सर्वाधिक प्रिय हैं इसलिए स्वर्ण आभूषण नाभि से ऊपर ही धारण किये जाये और यही वजह है कि श्रृंगार का क्रम सिर से होते हुए पैरों तक पहुंचता है।

ये तो हुई सोने पहनने की बात, अब बात करते हैं मांग टीका की, जिसके बिना शादियां नहीं होती हैं, हिंदू -मुस्लिम दोनों ही शादियों में इस गहने का प्रयोग होता है। आप जानते हैं वेदों में कहा गया है कि महिलाएं जब भी श्रृगांर करें तो वो सबसे पहले मांग टीका धारण करें, क्योंकि यह पति द्वारा प्रदान किये गये सिंदूर का रक्षक होता है। ललाट पर लटकता हुआ इसका अंतिम छोर दोनों भवों के नीचे पहुंचता है, जहां पर पुरूष तिलक लगाते हैं इसलिए इसका नाम मांग टीका है। क्योंकि ये पूरी तरह मांग को आच्छादित करके टीके के स्थान पर पहुंचता है।












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