जन्मी बेटी बधाई हो बधाई

When girl born in any family
दिल्‍ली की सुमनलता सिंह द्वारा लिखी गई कविता जो एक लड़की के जीवन को बयां करती है-

पापा की थी बस इच्छा एक,
जन्मे बेटा बढ़े विवेक।
मन में तब बेचैनी छाई,
जन्मी मैं जब खबर सुनाई।

गोदी को मन ही मन तरसी,
माँ की ममता कुछ कुछ बरसी,
भाई अधिक था माँ को प्यारा,
वो पापा की आँख का तारा,
हर्ष नहीं चिंता संग लाई,
जन्मी मैं जब खबर सुनाई।

दोनों बड़े हुए कुछ ऐसे,
धरती और आकाश हों जैसे,
एक जो मांगे मिला सभी,
एक को कुछ न मिला कभी,
संघर्षों की फिर बारी आई,
जन्मी मैं जब खबर सुनाई।

शिक्षा का वरदान मिला,
कुछ करने का ज्ञान मिला,
भाई की हुई इन्जीनियरिंग पूरी,
मेरी शिक्षा रही अधूरी,
आंसू की हर एक बूंद छुपाई,
जन्मी मैं जब खबर सुनाई।

पापा ने कन्यादान किया,
बहू का मुझको नाम दिया,
घर से भेजा यह कहकर,
झुकने न देना बेटी अब सर,
पापा ने दी फिर मुझे विदाई,
जन्मी मैं जब खबर सुनाई।

भाई ने उनको ऐसे छोड़ा,
उनका दुखों से रिश्ता जोड़ा,
उनको मिला फिर मेरा साथ,
बोली मैं न छोड़ूं हाथ,
जीवन में उनके खुशियाँ ले आई,
जन्मी मैं जब खबर सुनाई।

बेटी न बेटों से कम,
अब न रहेंगे पीछे हम,
माँ पापा का गर्व हम बनेंगे,
जीवन में उनके रंग भरेंगे,
सभी जगह अब देगा सुनाई,
जन्मी बेटी बधाई हो बधाई।

पढ़ें- सुमनलता सिंह की अन्‍य कवितायें

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