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Raksha Bandhan 2022: क्या है रक्षा बंधन का मतलब, क्यों मनाते हैं राखी का त्योहार?

नई दिल्ली, 10 अगस्त। सावन मास की पूर्णिमा के दिन भाई-बहन के प्रेम का त्योहार 'रक्षा बंधन' मनाया जाता है। वैसे तो इतिहास में इस पर्व के प्रमाण मिलते है लेकिन ये बताना मुश्किल है कि आखिर ये इस त्योहार की शुरुआत हुई कब?

धागों का ये त्योहार प्रेम-भरोसे और समर्पण का प्रतीक

धागों का ये त्योहार प्रेम-भरोसे और समर्पण का प्रतीक

इस पर्व के बारे में बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं, जिनका सार यही है कि धागों का ये त्योहार प्रेम, भरोसे, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। धागा किसी की भी कलाई में बांधा जाए, चाहे वो भाई हो, गुरु हो या फिर पूज्यनीय व्यक्ति , इसका मकसद केवल एक ही होता है और वो है उस व्यक्ति के प्रति अपना प्रेम, विश्वास और उसके लिए बहुत सारी दुआएं।

आइए जानते हैं रक्षा बंधन से जुड़ी कुछ खास कथाओं के बारे में...

आइए जानते हैं रक्षा बंधन से जुड़ी कुछ खास कथाओं के बारे में...

'रक्षा बंधन' की सबसे लोकप्रिय कहानी रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं की है, जहां एक राजपूत कन्या ने मुगल सम्राट को अपना भाई मानकर राखी का धागा भेजा था।

कर्णावती चित्तौड़ की रानी थी...

कर्णावती चित्तौड़ की रानी थी...

कर्णावती चित्तौड़ की रानी थी और उसने अपने राज्य को बहादुर शाह से बचाने के लिए हुमायूं से मदद मांगी थी, वो भी राखी भेजकर, जिस पर हुमायूं ने उनका मान रखते हुए उनकी मदद की थी और अपनी सेना को चित्तौड़ भेजा था और रानी कर्णावती और उनके राज्य की रक्षा की थी। कहा जाता है कि तब से ही राखी बांधने की परंपरा बन गई।

राजा बाली और इंद्र देवता की कहानी

राजा बाली और इंद्र देवता की कहानी

राखी की दूसरी लोकप्रिय कहानी राजा बाली और इंद्र देवता की है, असुरों के राजा बाली ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया था इससे देवताओं के राजा इंद्र को काफी नुकसान पहुंचा था। बाली तो राजा इंद्र की जान का प्यासा हो गया था। ऐसे में इंद्र की पत्नी शची दुखी होकर भगवान विष्णु के पास मदद के लिए पहुंची तो भगवान विष्णु ने उन्हें एक धागा दिया और कहा कि जाकर पति की कलाई पर बांध दो। शचि ने ठीक वैसे ही किया और इसके बाद इंद्र ने बाली को पराजित कर दिया, तब से ही रक्षासूत्र बांधने की परंपरा बन गई।

भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कहानी

भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कहानी

तीसरी सबसे लोकप्रिय कहानी भगवान कृष्ण और द्रौपदी की है। महाभारत में जिक्र है कि दुष्ट शिशुपाल को मारते वक्त श्रीकृष्ण की उंगली कट गई थी, जिस पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी के पल्लू को फाड़कर उनकी चोट पर पट्टी बांधी थीं। तब कृ्ष्ण ने उन्हें हमेशा रक्षा करने का वचन दिया था और वो उन्होंने तब निभाया जब दुष्ट दुःशासन ने भरी सभा में द्रौपदी का चीर हरण करने की कोशिश की थी।

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