Vinayaka Chaturthi 2023 : विनायक चतुर्थी आज, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और स्तुति
Vinayaka Chaturthi 2023 : गणेश जी की उपसना इंसान को धन, बल, शक्ति और ज्ञान प्रदान करती है। इंसान सारे कष्टों से दूर हो जाता है यश प्राप्त करता है।

Vinayaka Chaturthi 2023 shubh Muhurat: आज ज्येष्ठ मास की विनायक चतुर्थी है। गणेश जी की पूजा करने से इंसान के सारे कष्टों का अंत हो जाता है। वो विध्नहर्ता हैं और सारे दुख हरने वाले हैं। उनकी पूजा सच्ची मन से करने इंसान के सारे कष्टों का अंत होता है और इंसान को सारे सुखों की प्राप्ति होती है। गणपति बप्पा अपने भक्तों की हर तरह से रक्षा करते हैं।
ज्येष्ठ विनायक चतुर्थी 2023 मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी 22 मई 2020 को रात 11:18 से शुरू हो चुकी है और ये 24 मई 2023 को प्रातः 12:57 पर समाप्त होगी। उदया तिथि मान्य होने के कारण विनायक चतुर्थी आझ मनाई जा रही है। इनकी पूजा आप पूरे दिन में कभी भी कर सकते हैं।
पूजा विधि
- सबसे पहले नहाधोकर स्वच्छ कपड़े धारण करें।
- फिर व्रत का संकल्प लें।
- गणेश भगवान की मूर्ति या तस्वीर किसी चौकी पर रखकर पूजा प्रारंभ करें।
- गणेश जी को फूल, फल और मेवा चढा़एं।
- गणेश जी मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
- गणेश जी कथा पढ़ें और आरती करें।
- फिर प्रसाद बांटे।
- शाम को चंद्रमा की अर्ध्य दें ।
- प्रसाद ग्रहण करके व्रत अपना खोलें।
इन मंत्रों से करें गणेश जी पूजा
- वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
- विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लंबोदराय सकलाय जगद्धितायं।नागाननाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।।
- अमेयाय च हेरंब परशुधारकाय ते।मूषक वाहनायैव विश्वेशाय नमो नमः।।
- एकदंताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः। प्रपन्न जनपालाय प्रणतार्ति विनाशिने।।
- एकदंताय विद्महे, वक्रतुंडाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात।।
गणेश स्तुति
- ॐ गजाननं भूंतागणाधि सेवितम्, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम्।
- उमासुतम् शोक विनाश कारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्॥
स्तुति
- गाइये गनपति जगबंदन।
- संकर-सुवन भवानी नंदन ॥
- गाइये गनपति जगबंदन।
- सिद्धि-सदन, गज बदन, बिनायक।
- कृपा-सिंधु, सुंदर सब-लायक ॥
- गाइये गनपति जगबंदन।
- मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता।
- बिद्या-बारिधि, बुद्धि बिधाता ॥
- गाइये गनपति जगबंदन।
- मांगत तुलसिदास कर जोरे।
- बसहिं रामसिय मानस मोरे ॥
- गाइये गनपति जगबंदन।












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