Vat Savitri Purnima Vrat: वट सावित्री पूर्णिमा व्रत आज, जानिए महत्व और पूजा विधि
नई दिल्ली, 22 जून। ज्येष्ठ अमावस्या की तरह ही ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भी व्रत किया जाता है। इसे वट सावित्री पूर्णिमा व्रत किया जाता है। दोनों व्रतों में अंतर कुछ नहीं है, बस जो लोग शुक्ल पक्ष से माह का प्रारंभ मानते हैं वे अमावस्या का व्रत रखते हैं और जो लोग कृष्ण पक्ष से माह का प्रारंभ मानते हैं वे पूर्णिमा का व्रत करते हैं। वट सावित्री पूर्णिमा के दिन कुछ विशेष प्रयोग और उपाय भी किए जाते हैं, जो आपकी आर्थिक समृद्धि को बढ़ाने में सहायता करते हैं। वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 24 जून 2021 गुरुवार को आ रहा है। इस दिन के पूजन का विधान भी वट सावित्री अमावस्या की तरह ही है।

करें कुछ विशेष उपाय
- वट सावित्री पूर्णिमा का महत्व मानसिक तनावों, उलझनों, निर्णय लेने में मुश्किल दूर करने के लिए ज्यादा है। इसलिए इस दिन चंद्र से जुड़े भी अनेक प्रयोग किए जाते हैं।
- इस दिन बरगद, पीपल और नीम की त्रिवेणी रोप कर प्रतिदिन उसमें जल अर्पित करने का बड़ा महत्व है। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं। कुंडली में पितृदोष से मुक्ति मिलती है और तरक्की के मार्ग खुलने लगते हैं।
- वट सावित्री पूर्णिमा के दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप करते हुए पीपल के वृक्ष पर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करें। परिक्रमा पूर्ण होने पर वृक्ष के नीचे आटे के पांच दीये प्रज्ज्वलित करें। इससे आपकी आर्थिक समस्याएं दूर होंगी।
- पूर्णिमा के दिन घर में सुंदरकांड का पाठ करें। हनुमानजी को शुद्ध घी के हलवे का नैवेद्य लगाएं। इससे चमत्कारिक रूप से पैसों के आगमन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
- मानसिक पागलपन और भावनात्मक उद्वेग दूर करने के लिए पूर्णिमा के दिन एक सूखे नारियल गोले में छोटा सा छेद करके उसमें गरम करके ठंडा किया हुआ मीठा दूध भर दें और दूध को दूसरे दिन मानसिक कमजोर व्यक्ति को पिलाया जाए तो वह शीघ्र स्वस्थ होने लगता है। यह प्रयोग 11 या 21 पूर्णिमा के दिन करना चाहिए।
- पूर्णिमा के दिन पारे के श्रीयंत्र की स्थापना घर में करना अत्यंत शुभ होता है।
- इस दिन स्ति्रयों को सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखना चाहिए।












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