आयु और आरोग्यता में वृद्धि के लिए वैशाख माह में प्रारंभ करें सूर्य व्रत

नई दिल्ली, 20 अप्रैल। भगवान सूर्य न केवल ब्रह्मांड को प्रकाशवान करते हैं, अपितु वे जीवन देने वाले देवता भी हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है। सूर्य की उच्च अवस्था में जातक को मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा, सुख, आरोग्यता और दीर्घायु प्राप्त होती है, लेकिन यदि जन्मकुंडली में सूर्य खराब दशा में है, पापकारी होकर बैठा है तो जातक को विपरीत प्रभाव मिलते हैं। ऐसे में सूर्य व्रत करने का विधान बताया गया है।

लंबी आयु के लिए वैशाख माह में प्रारंभ करें सूर्य व्रत

कैसे किए जाते हैं सूर्य व्रत

सूर्य व्रत वैशाख माह के किसी भी रविवार से प्रारंभ किए जाते हैं। सूर्य व्रत एक वर्ष या 30 रविवारों तक किए जाते हैं। यदि आपने एक वर्ष का संकल्प लिया है तो वैशाख से वैशाख माह तक करना चाहिए अन्यथा लगातार 30 रविवारों तक भी किए जा सकते हैं। व्रत के दिन व्रती लाल रंग का वस्त्र धारण करके अपने पूजा स्थान को शुद्ध स्वच्छ करके लाल आसन पर बैठ जाएं। सामने सूर्य का चित्र का सूर्य यंत्र एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गेहूं की ढेरी पर स्थापित करें। सूर्य देव का पूजन लाल चंदन और लाल पुष्प से करें। नैवेद्य में गुड़, गुड़ के हलवे का भोग लगाएं। वहीं बैठकर ऊं ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम: मंत्र का 12 अथवा पांच माला जप करें। जप के बाद शुद्ध जल, लाल चंदन, अक्षत, लाल पुष्प और दूर्वा से सूर्य को अ‌र्घ्य दे। भोजन में गेहूं की रोटी, दलिया, दूध, दही, घी और चीनी का सेवन करें। सूर्य व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए। प्रत्येक रविवार को इसी प्रकार पूजन करें।

कैसे करें व्रत का उद्यापन

आपके संकल्प के अनुसार सूर्य व्रत पूर्ण हो जाने पर इसका उद्यापन किया जाता है। किसी योग्य विद्वान ब्राह्मण को बुलवाकर व्रत का विधि विधान से उद्यापन कराएं। उद्यापन में 12 ब्राह्मणों को भोजन करवाकर उन्हें दान-दक्षिणा दें।

व्रत का फल

  • सूर्य व्रत के प्रभाव से सूर्य की प्रसन्नता प्राप्त होती है। सूर्य की पीड़ा समाप्त होती है।
  • आयु में वृद्धि होती है और निरोगी शरीर प्राप्त होता है।
  • जो लोग अत्यधिक बीमार रहते हैं, उनके निमित्त उनके स्वजन भी यह व्रत कर सकते हैं।
  • त्वचा, नेत्र और मस्तिष्क संबंधी रोगों से पीड़ितों को यह व्रत करना चाहिए।
  • जन्मकुंडली में सूर्य बुरे प्रभाव दे रहा हो तो यह व्रत करना चाहिए।
  • मान-सम्मान में कमी, नौकरी में उन्नति के लिए यह व्रत अवश्य करना चाहिए।

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