आप कलाकार हैं? तो बनिए राष्ट्रपति के मेहमान
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अगर आप लेखक या चित्रकार हैं और आपको देश के प्रथम नागरिक के आवास में कुछ दिनों तक रहकर काम करने का मौका मिले तो कैसा रहे। अब यह मुमकिन है। राष्ट्रपति भवन के सितम्बर 2014 के ‘इन रेजिडेंस' कार्यक्रम में दो कलाकार और दो लेखक शामिल होंगे। जानकारी के मुताबिक, ये सभी 8 सितम्बर से 26 सितम्बर तक राष्ट्रपति भवन में रहेंगे।

अगले माह गंगटोक से सुश्री यिशी डोमा भूटिया और कड़प्पा, आंध्र प्रदेश से डॉ. वेमपल्ली गंगाधर, चेन्नई श्री राहुल सक्सेना और मुम्बई से श्री प्रताप सुधीर मोरे को राष्ट्रपति भवन में रहकर अपनी कला को निखारने का मौका मिलेगा।
तेलुगू लेखक डॉ. वेमपल्ली गंगाधर को उनकी कृति ‘मोलाकला पुन्नामी' के लिए 2011 में साहित्य अकादमी ने युवा पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने किसानों, महिलाओं तथा रायलसीमा के सूखाग्रस्त क्षेत्रों आदि पर कई किताबें और लेख लिखे हैं। सिक्किम साहित्य सम्मान 2013 की विजेता सुश्री यिशी डोमा भूटिया एक पत्रकार-लेखिका हैं। वर्तमान में वह ‘सिक्किम एक्सप्रेस' में कॉपी संपादक हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें से प्रमुख हैं: ‘लीजेंडस ऑफ द लेप्चाज: फॉकटेल्स फ्रॉम सिक्किम', ‘सिक्किम: द हिडन फ्रूटफुल वैली', ‘सिक्किम: अ ट्रैवलर कंपेनियन', ‘द लीगेसी मेकर: पवन चामलिंग आइडियाज़ दैट शेप्ड सिक्किम'।
अदलाव का कलाकार
राहुल सक्सेना अपने आप को ‘बदलाव का कलाकार' कहलाना पसंद करते हैं, जो रोज़मर्रा की चीजों को खूबसूरत कलाकृतियों में बदल देते हैं। उनका मानना है कि बदलाव की यह ललक ही विविध संभावनाओं की आधारशिला है। सक्सेना कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ 15 साल काम करने के बाद पूर्ण रूप से कलाकार बने।
प्रताप सुधीर मोरे को उनकी कला के लिए कई पुरस्कार मिल चुके है तथा देश-विदेशों में उनकी कलाकृतियों की प्रदर्शनी हो चुकी है। मोरे की कलाकृतियां शरीर, शहरी जीवन तथा इनके आपसी संबंध का चित्रण करती हैं। अपनी कृतियों के माध्यम से वे पुनर्विकास, विस्थापन तथा शहरी जीवन के तेज विकास जैसे विषय उठाते हैं।












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