Tulsi Vivah 2022 Muhurat & Katha : क्या है तुलसी विवाह का मुहूर्त और कथा?
Tulsi Vivah Katha & Muhurat: जो लोग कार्तिक मास की द्वादशी तिथि में तुलसी विवाह करते हैं, वो लोग शनिवार यानी कि 5 नवंबर को तुलसी माता का ब्याह भगवान शालिग्राम से करेंगे। आपको बता दें कि जिस दिन तुलसी विवाह होता है, उस दिन घर में एक उत्सव सा माहौल होता है। मां तुलसी का श्रृंगार वैसे ही होता है जैसे किसी लड़की को ब्याह के लिए सजाया जाता है। तुलसी विवाह से पहले हर किसी को इस विवाह के कारण और कथा के बारे में मालूम होना चाहिए।
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पौराणिक कथाओं के मुताबिक आदिकाल में एक जलंधर नाम का दुष्ट राक्षस था, जो कि काफी बलशाली था, यूं तो उसमें काफी बुराईयां थीं लेकिन उसने एक अच्छा काम किया था और वो था वृंदा कन्या से ब्याह। वृंदा भगवान विष्णु की बहुत बड़ी भक्त थी। वो दिन रात उनकी पूजा में लीन रहा करती थी। उसे पता था कि उसका पति एक असुर है लेकिन इसके बावजूद वो अपना पत्नीधर्म पूरी ईमानदारी से निभाती थी। उसकी पूजा से खुश होकर भगवान विष्णु ने उसे सदा सुहागन रहने का आशीष दिया था।

इस आशीष के बाद जलंधर की शक्ति में इजाफा हो गया था, वो पहले से ज्यादा ताकतवर हो गया था लेकिन उसने अपनी ताकत का प्रयोग गलत चीजों में करने लगा। वो देवताओं और देवकन्याओं को तंग करने लगा, जिससे परेशान होकर सभी देवतागण भगवान विष्णु के पास मदद के लिए भागे, जब विष्णु को पता चला कि ये सब उनके ही एक वरदान के कारण हो रहा है तो वो काफी दुखी हुए और उन्होंने जलंधर को सबक सिखाने के लिए एक माया की रचना की।
जलंधर की शक्ति आधी हो गई
उन्होंने जलंधर का रूप धारण करके वृंदा का सतीत्व भंग कर दिया जिसके बाद जलंधर की शक्ति आधी हो गई और वो युद्ध में माारा गया लेकिन वृंदा को जब सच का पता चला तो उसे बड़ा ही क्रोध आया और उसने धोखा करने के लिए भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया लेकिन बाद में देवताओं की प्रार्थना पर उसने अपना श्राप वापस ले लिया और जंलधर की चिता के साथ सती हो गईं लेकिन भगवान विष्णु की अपनी गलती पर शर्म आई, जिसका पश्चाताप करने के लिए उन्होंने अपना एक रूप शालिग्राम कर लिया।

जहां वृंदा सती हुई थी वहां पर तुलसी के पौधे ने जन्म लिया। जिन्हें विष्णु ने पावन होने का वरदान दिया और अपनी गलती को संशोधित करते हुए शालिग्राम की पत्नी होने का अधिकार दिया और कार्तिक मास की द्वादशी तिथि पर तुलसी से विवाह रचाया और तब से ही लोग इस दिन तुलसी विवाह करने लग गए। इसलिए भगवान विष्णु को तुलसी का भोग लगाया जाता है। तुलसी को मां लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है।
तुलसी विवाह शुभ मुहूर्त
- तुलसी विवाह तिथि -05 नवंबर 2022
- तुलसी विवाह शुभ मुहूर्त: 5 नवंबर शाम 05:35 बजे से शाम 07:12 बजे तक
- तुलसी विवाह के दिन रवि योग बन रहा है जो कि विवाह के लिए शुभ होता है।
तुलसी विवाह का महत्व
कहते हैं जिस घर में तुलसी विवाह होता है, वहां हमेशा खुशहाली रहती है। मां लक्ष्मी और विष्णु की कृपा उस घर में बनी रहती है। पति-पत्नी के बीच में हमेशा प्रेम रहता है, उनके घर में भूलकर भी कोई दुख नहीं आता है। सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।












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