Sharadiya Navratri 2024: आज से नवरात्रि प्रारंभ, जानिए घर में कैसे करें घट स्थापना?
Sharadiya Navratri 2024 (घटस्थापना-पूजा सामग्री): आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्र प्रारंभ होते हैं और आज ही वो पावम दिन है।
प्रथम दिन घरों और मंदिरों में घट स्थापना करके देवी का आह्वान किया जाता है। शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की जाती है।इसके लिए वैदिक विद्वान, पंडितों या पुरोहितों की आवश्यकता होती है जो वैदिक मंत्रोच्चार के साथ घट स्थापना करते हैं।

किंतु आप स्वयं भी अपने घर में शुद्धता के साथ घट स्थापना कर सकते हैं। हम आपको बता रहे हैं सरल विधि जिसके माध्यम से आप देवी को अपने घर और ह्दय में आमंत्रित करके नौ दिन उनकी आराधना, साधना, पूजा कर सकते हैं।
घटस्थापना के लिए आवश्यक सामग्री
- सप्त धान्य बोने के लिए एक चौड़ा मिट्टी का पात्र।
- धान्य बोने के लिए स्वच्छ काली मिट्टी।
- सात प्रकार के धान्य या केवल गेहूं जवारे बोने के लिए। अधिकांश जगह केवल गेहूं बोए जाते हैं।
- एक छोटे आकर का मिट्टी का कलश जिसे घट कहा जाता है।
- कलश में भरने के लिए गंगाजल मिश्रित शुद्ध जल।
- कच्चा सूत, मौली।
- इत्र, देवी पूजा में इत्र का प्रयोग आवश्यक है।
- पूजा की सुपारी
- आम के पांच पत्ते।
- कलश को ढंकने के लिए मिट्टी का ढक्कन।
- कलश के ऊपर पात्र में रखने के लिए अक्षत।
- जटा वाला श्रीफल।
- श्रीफल पर लपेटने के लिए लाल सूती वस्त्र।
घटस्थापना के लिए कलश कैसे बनाएं
- सबसे पहले मिट्टी के बड़े पात्र में मिट्टी की एक परत बिछाएं, फिर उसमें गेहूं के दानें बीच में गोलाकर डालें। इसके ऊपर फिर मिट्टी की दूसरी परत डालें और बीच वाले दानों के थोड़ी दूरी पर गोलाकार में गेहूं के दूसरे दानें डालें। फिर इसके ऊपर मिट्टी की एक और परत डालें और फिर पात्र के किनारे-किनारे गेहूं के दानों की तीसरी परत डालें। आवश्यकतानुसार पानी डालें।
- अब कलश लें तथा उसमें मौली बांधें और कलश को शुद्ध जल से भर लें। कलश में पूजा की सुपारी, इत्र, दूर्वा, अक्षत, पान का पत्ता तथा सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम के पांच पत्ते सजा दें तथा उसे मिट्टी के ढक्कन से ढंक दें।
- अब एक नारियल को लाल कपड़े में लपेट लें और उसे मौली से बांध लें। इस नारियल को कलश के ऊपर रखे पात्र या ढक्कन के ऊपर रख दें।
- इस कलश को उस पात्र के मध्य में स्थापित करें, जिसमें हमने गेहूं बोए थे।
अब पूजन प्रारंभ करें
अब अपने घर के पूजा स्थान में एक बड़े बाजोट या चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर देवी का चित्र अथवा मूर्ति स्थापित करें और उस पर उपरोक्त विधि से बनाए गए कलश को स्थापित करें। वैदिक मंत्रोच्चार से पहले गणेश पूजन करें, कलश पूजन करें स्थापित करें और फिर उस कलश अथवा घट में देवी दुर्गा का आव्हान करें। समस्त द्रव्यों से देवी का पूजन करें। पुष्पों से श्रृंगार करें और पंचोपचार पद्धति से पूजन संपन्न करें। मिष्ठान्न, पंच मेवे, फलों का नैवेद्य लगाएं। देवी की आरती करें। फिर नौ दिनों तक सप्तशती का पाठ करें।
क्या सावधानियां रखें
- देवी दुर्गा की पूजा में शुद्धता का बड़ा महत्व होता है। नवरात्र से पहले पूरे घर की साफ-सफाई कर लें।
- पूजा स्थान में रंग-रोगन, पुताई करके उसे सुंदर, आकर्षक बना लें।
- इसके बाद पूरे घर में गोमूत्र अथवा गंगाजल का छिड़काव कर दें।
- घट स्थापना करने वाले सभी व्यक्ति शुद्ध, साफ चित्त से हृदय में देवी का ध्यान करते हुए साफ वस्त्र पहनते हुए पूजा में बैठें।
- घट स्थापना होने के बाद घर में मांस-मदिरा आदि का सेवन न करें। पूजा करने वाले व्यक्तियों को नौ दिनों तक इन सब चीजों से दूर रहना चाहिए।
- स्त्री संसर्ग से दूर रहें। चोरी, झूठ बोलना, पशु पक्षियों को सताना, किसी असहाय व्यक्ति को सताने जैसे काम न करें।












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