Shani Jayanti Aaj Hai: आज है शनि जयंती, जानिए महत्व और कथा
Shani Jayanti Aaj Hai: ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन शनि देव का जन्मोत्सव मनाया जाता है,आज ये पावन दिन आया है, विशेष बात यह है कि इस बार शनि जयंती के दिन अनेक शुभ योग संयोग बने हैं। शनि जयंती के दिन मंगलवार, भावुका अमावस्या, भौमवती अमावस्या, रोहिणी नक्षत्र, सुकर्मा योग, नाग करण, बुधादित्य योग, द्विपुष्कर योग और सर्वार्थसिद्धि योग भी बन रहा है।
इतने सारे योग-संयोग के साथ आ रही शनि जयंती के दिन कर्मफल दाता शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय करेंगे तो वे अवश्य शुभाशीष प्रदान करेंगे।

जिन लोगों को शनि की महादशा-अंतरदशा, साढ़ेसाती, ढैया आदि चल रहा हो वे इस दिन शनिजनित पीड़ा की शांति के लिए शनिदेव की मूर्तिपूजा, अभिषेक, शनि मंत्रों का जाप, हवन, शनि स्तोत्र-कवच का पाठ, शनि देव से जुड़ी चीजों का दान करेंगे।
शनिदेव की कथा (Shani Jayanti Katha)
शनि देव के जन्म की अनेक कथाएं पुराणों में प्रचलित हैं जिनमें सबसे प्रमुख कथा स्कंद पुराण, भागवत पुराण और अन्य ग्रंथों में वर्णित हैं। शनि देव का जन्म भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संज्ञा की बहन छाया (संवर्णा) से हुआ है। संज्ञा अपने पति सूर्य के तेज से अत्यधिक क्लांत हो गई थीं कि वह तपस्या के लिए अपने पिता के घर चली गई और अपने स्थान पर अपनी छाया को रख दिया।
छाया ने भगवान सूर्य से एक पुत्र को जन्म दिया
सूर्यदेव को इस बात की जानकारी नहीं थी। कुछ समय बाद छाया ने भगवान सूर्य से एक पुत्र को जन्म दिया, जो अत्यंत तेजस्वी, गहन तपस्वी और कठोर स्वभाव वाला था किंतु उसका वर्ण अत्यंत काला था।
'शनि ने अपने पिता से विमुख होकर गहन तप किया'
यही बालक शनिदेव था। जब शनि माता के गर्भ में थे, तब उन्होंने कठोर तपस्या की, जिस कारण उनका रंग काला हो गया। जब शनि का जन्म हुआ, तब सूर्यदेव ने उनका रंग देखकर उन्हें अपनाने से इन्कार कर दिया। इस कारण शनि ने अपने पिता से विमुख होकर गहन तप किया और भगवान शिव की घोर आराधना की। शिव प्रसन्न हुए और शनिदेव को न्याय का देवता, कर्मफलदाता एवं ग्रहों में विशेष स्थान प्रदान किया।
शनि का शाप और न्याय का स्वरूप ((Shani Jayanti)
कथाओं के अनुसार अपने पिता सूर्यदेव द्वारा उपेक्षा मिलने के कारण शनिदेव में न्याय की भावना और कर्म का सिद्धांत मजबूत हुआ। वे सभी प्राणियों को उनके कर्मों के अनुसार फल देने लगे। यही कारण है कि शनि को "कर्मफलदाता" कहा जाता है। पिता सूर्यदेव द्वारा नहीं अपनाए जाने के कारण ग्रहों में सूर्य और शनि की शत्रुता है।












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