Pavitra Dwadashi 2022: पवित्रा द्वादशी और भौम प्रदोष दोनों आज, जानिए पूजा विधि

नई दिल्ली, 05 अगस्त। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को पवित्रा द्वादशी, दामोदर द्वादशी, पवित्रा बारस कहा जाता है। यह द्वादशी आज है तो वहीं आज भौम प्रदोष का शुभ संयोग भी है। इसलिए भगवान विष्णु और शिवजी का आशीर्वाद प्राप्त करने का यह श्रेष्ठ दिन है। इसी दिन शुक्र का पुष्य नक्षत्र में भ्रमण करना आर्थिक स्थिति के लिए लाभदायक रहेगा। पवित्रा द्वादशी मुख्यत: वैष्णव संप्रदाय को मानने वाले करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु का पवित्रारोपण किया जाता है। पवित्रा द्वादशी का पूजन करने का उद्देश्य यह होता है किवर्षभर आपके द्वारा की गई पूजा आदि का शुभ फल प्राप्त हो और आगे आने वाले वर्षभर आपके द्वारा की गई पूजाओं, व्रतों आदि का फल भगवान विष्णु प्रदान करें। इस व्रत में भगवान विष्णु को कपास के सूत से बना पवित्रक धारण करवाया जाता है।

 Pavitra Dwadashi 2022: पवित्रा द्वादशी के दिन भौम प्रदोष का शुभ संयोग

पवित्रा द्वादशी पूजन कैसे करें

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा की जाती है। यह व्रत वैसे तो सभी लोग कर सकते हैं किंतु अधिकतर इसे वैष्णव संप्रदाय के लोग ही करते हैं। इसमें भगवान विष्णु और शिवजी का विधिपूर्वक पूजन करें। भगवान को जो पवित्रक अर्पित किया जाता है उसके संबंध में शास्त्रों में कहा गया है किसतयुग में मणिमय, त्रेता में स्वर्णमय, द्वापर में रेशम का और कलयुग में कपास के सूत का पवित्रक अर्पित करना चाहिए।

पवित्रक अर्पण करने की विधि

  • एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और शिवजी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। एक कलश भी स्थापित करें।
  • पवित्रकों को बांस की टोकरी में रखकर सुंदर वस्त्र से ढंककर भगवान के सम्मुख रहें।
  • इसके बाद भगवान से कहें किहे प्रभु! मैं आपकी प्रसन्नता के लिए कहता हूं, मेरे कार्य में कोई विघ्न न आए, आप ही मेरी परमगति हैं। मैं इस पवित्रक से आपको प्रसन्न करता हूं। हे देवेश! वर्ष पर्यन्त आप मेरी रक्षा करें और मेरी पूजा का श्रेष्ठ फल मुझे प्रदान करें।
  • इसके बाद कलश में देवताओं का आव्हान करके बांस की टोकरी में रखे हुए पवित्रक की प्रार्थना करें।
  • इसके बाद हाथ में अक्षत, पुष्प लेकर प्रार्थना करें किहे भगवन मैं आपको पवित्रक धारण करवाता हूं। ऐसा कहकर भगवान विष्णु को पवित्रक धारण करवाएं।
  • समस्त सामग्री से पूजन करें। धूप-दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
  • घृत सहित खीर का हवन करें।
  • पूजन पूर्ण होने के बाद पवित्रक का विसर्जन करें।

भौम प्रदोष में करें शिवजी का पूजन

मंगलवार के दिन प्रदोष के आने से भौम प्रदोष का संयोग बना है। इस दिन सायंकाल प्रदोष काल में भगवान शिव का विधिवत पूजन करें। प्रदोष व्रत की कथा सुनें। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत करने से कर्ज मुक्ति प्राप्त होती है। संकटों से रक्षा होती है। आर्थिक परेशानियों का समाधान मिलता है।

द्वादशी तिथि

  • द्वादशी तिथि प्रारंभ 8 अगस्त को रात्रि में 9.03 बजे से
  • द्वादशी तिथि पूर्ण 9 अगस्त को सायं 5.48 बजे तक

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